EPISODE · Aug 25, 2022 · 53 MIN
साधना पञ्चकं : प्रवचन-04 (सूत्र-3)
from Vedanta Ashram Podcasts · host Vedanta Ashram
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के चौथे प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित तीसरे सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें आचार्यश्री कहते हैं की "तेनेशस्य विधीयताम अपचितिः" अर्थात - उसके द्वारा ईश्वर की पूजा संपन्न करो। उसके अर्थात अपने द्वारा अनुष्ठित सभी वेदोक्त कर्मों के द्वारा (जिसका पिछले सूत्र में विधान किया गया था) ईश्वर की पूजा करें। यहाँ यह दर्शनीय है कि हमारे सभी कर्म ईश्वर की आराधना की निमित्त बन जाएँ - न की कोई गिने-चुने कर्म-विशेष। इस सूत्र को क्रियान्वित करने के लिए एक तो हमें ईश्वर का ऐसा परिचय प्राप्त करना चाहिए जिसके फलस्वरूप हमारे ह्रदय में ईश्वर की महानता का प्रगाढ़ भाव जग जाए और उनकी सतत कृतज्ञता से युक्त होकर उनकी सेवा करने की इच्छा हो जाए। और दूसरी बात, अपने कर्म को ईश्वर अर्पित कैसे किया जाता है। इसके लिए यह बहुत अच्छा होता है की हम प्रारम्भ में अपने मंदिर में पूजा करना सीखें और फिर उसी पूजा-भाव को सभी कर्मों में समाविष्ट करें। विस्तृत विवेचना के लिए ध्यान से प्रवचन सुनें।
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