EPISODE · Sep 10, 2022 · 59 MIN
साधना पञ्चकं : प्रवचन-20 (सूत्र-19)
from Vedanta Ashram Podcasts · host Vedanta Ashram
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 20वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ के 19वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की "दुस्तर्कात सुविरम्यतां"- अर्थात, दुस्तर्क से दूर रहें। आचार्यश्री ने पिछले सोपान में हमें महावाक्य के अर्थ को समझने में शास्त्रोक्त पक्ष का ही आश्रय लेने का सुझाव दिया था। अब यहाँ पर कह रहे हैं की शास्त्र के सिद्धांत के विपरीत बात को कहने वालों लोगों के तर्कों से प्रभावित न हों। वेदान्त शास्त्र जो की हमें पूर्ण और दिव्य बता रहा है - इसका विश्वास सदैव बनाए रखें। दुस्तर्क को शास्त्रोक्त तर्क से बाधित करें। दुस्तर्क करने वालों से द्वेष न करें, बल्कि बुद्धि को बुद्धि से निपटें। इस प्रक्रिया में हमारी अपने ज्ञान में निष्ठा और दृढ़ हो जाती है। यह ही मनन होता है।
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