EPISODE · Jan 30, 2024 · 2 MIN
Sach Choocha Hota Hai | Amitava Kumar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सच छूछा होता है।- अमिताव कुमार महात्मा गाँधी की आत्मकथा मेंमौसम का कहीं ज़िक्र नहीं,लंदन की किसी ईमारत यासड़क के बारे में कोई बयान नहीं,किसी कमरे की, कभी एकत्रित भीड़ यायातायात के किसी साधन की कहीं कोईचर्चा नहीं–यह वी. एस. नायपॉल की आलोचना है।लेकिन मौसम तो गांधीजी के अंदर था!तूफान से जूझती एक अडिग आत्मा–नैतिकता की पतली पगडण्डी पर ठोकर खाता,संभलता, रास्ता बनाता बढ़ता हुआ इन्सान!अगर आप सच की खोज कर रहे हैं,क्या फर्क पड़ता है किसूरज आज शाम 6:15 पे डूबा कि 6:25 पे?लेकिन नायपॉल की बात सर-आँखों पर!अगर आप महात्मा नहींमहज लेखक हैं,आपको ध्यान देना होगानोट करना होगा,अपने आसपास की दीवारों परखरोंचे गए प्रेमियों के नामछतों पर गिरती बारिश की बूंदों का अंतराल आंधी में झूमते पेड़ों की डालों का लचीलापनसाइकिल की घंटी की आवाज़या फिर दंगे के बाद का सन्नाटालिखना होगा,कैंटीन में चुपचाप बैठी युवती के बारे मेंजिसके सामने रखे पानी के गिलास मेंपूरी दुनिया उलटी दिखाई देती है।
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