Sainik Pati Ke Prati | Kalyani Sen | Dr Deoshankar Naveen episode artwork

EPISODE · May 3, 2023 · 3 MIN

Sainik Pati Ke Prati | Kalyani Sen | Dr Deoshankar Naveen

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

सैनिक पति के प्रति - कल्याणी सेन तुम फ़ौजी वर्दी में सजे हुए घर आये और तुमने अपनी माँ से कहा - कल सुबह चला जाऊँगा पता नहीं बन्दूक, राइफ़लों के जंगल से कब लौट कर आऊँगा तो मैंने लाल फूलों की माला तुम्हें नहीं पहनाई मैंने चन्दन तिलक तुम्हें नहीं लगाया नहीं की तुम्हारी आरती-वंदना या तुम्हारे सकुशल लौट आने की पूजा और प्रार्थना बिना पते-ठिकाने की आती हैं तुम्हारी चिट्ठियाँ सीमा पर बंद है युद्ध बीत चुकी हैं सर्दियाँ गर्मी आ गई है पिघल रहा है हिमालय का बर्फ़ हवा में फिर लू-लपट भर आई है अब कुछ ही दिनों में मानसून फटेगा बरसात आ जायेगी आसमान में बादल छटेगा मुझे पता नहीं तुम कब वापस आओगे बिना पते-ठिकाने की आती हैं तुम्हारी चिट्ठियाँ मगर सुनों, कान में कहती हूँतुम आ रहे हो नन्हें से शिशु बनकर बहुत जल्दी आ रहे हो अपने साथ नया युग, नए गीत ला रहे हो इस गीत और इस युग का प्रणाम तुम्हे भेजती हूँ आगत शिशु की हर मुस्कान तुम्हें भेजती हूँ जब तुम आओगे तीन युग और तीन गीत तुम्हारा स्वागत करेंगे तुम्हारी माँ की ज्योतिहीन आँखों में उजाला भर आएगा तुम्हारी पत्नी का आश्वस्त चेहरा ख़ुशी के आँसू से गीला हो जायेगा और तुम्हारा नन्हा सा शिशु तुम्हारी बाँहों में मुस्कुराएगामुस्कुराता जाएगा कभी समाप्त नहीं होगी उसकी मुस्कान। 

सैनिक पति के प्रति - कल्याणी सेन तुम फ़ौजी वर्दी में सजे हुए घर आये और तुमने अपनी माँ से कहा - कल सुबह चला जाऊँगा पता नहीं बन्दूक, राइफ़लों के जंगल से कब लौट कर आऊँगा तो मैंने लाल फूलों की माला तुम्हें नहीं पहनाई मैंने चन्दन तिलक तुम्हें नहीं लगाया नहीं की तुम्हारी आरती-वंदना या तुम्हारे सकुशल लौट आने की पूजा और प्रार्थना बिना पते-ठिकाने की आती हैं तुम्हारी चिट्ठियाँ सीमा पर बंद है युद्ध बीत चुकी हैं सर्दियाँ गर्मी आ गई है पिघल रहा है हिमालय का बर्फ़ हवा में फिर लू-लपट भर आई है अब कुछ ही दिनों में मानसून फटेगा बरसात आ जायेगी आसमान में बादल छटेगा मुझे पता नहीं तुम कब वापस आओगे बिना पते-ठिकाने की आती हैं तुम्हारी चिट्ठियाँ मगर सुनों, कान में कहती हूँतुम आ रहे हो नन्हें से शिशु बनकर बहुत जल्दी आ रहे हो अपने साथ नया युग, नए गीत ला रहे हो इस गीत और इस युग का प्रणाम तुम्हे भेजती हूँ आगत शिशु की हर मुस्कान तुम्हें भेजती हूँ जब तुम आओगे तीन युग और तीन गीत तुम्हारा स्वागत करेंगे तुम्हारी माँ की ज्योतिहीन आँखों में उजाला भर आएगा तुम्हारी पत्नी का आश्वस्त चेहरा ख़ुशी के आँसू से गीला हो जायेगा और तुम्हारा नन्हा सा शिशु तुम्हारी बाँहों में मुस्कुराएगामुस्कुराता जाएगा कभी समाप्त नहीं होगी उसकी मुस्कान।

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This episode was published on May 3, 2023.

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