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Sankhyaein | Naresh Saxena

EPISODE · May 21, 2023 · 3 MIN

Sankhyaein | Naresh Saxena

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

संख्याएँ - नरेश सक्सेनाशब्द तो आए बहुत बाद मेंसँख्याएँ हमारे साथ जन्म से ही हैंगर्भ में जबनिर्माण हो रहा था हमारी हड्डियों कारक्तकणों और कोशिकाओं कासाथ-साथ सँख्याएँ भी निर्मित होती जा रही थींएक हमारी देह की इकाई की वो सँख्या हैजिसमें समाहित हैं सारी सँख्याएँदो आँखों में स्थित है दोतीन है उँगलियों के तीन जड़ों मेंहृदय के हिस्से हैं चारऔर पाँच का निवासपाँच उँगलियों में हैआगे की सारी सँख्याओं कोदेह में तलाशना बहुत मज़ेदार खेल हैनौ को तो अमर कर गए कबीरकि नौ द्वारे का पिंजरा ता में पंछी पौन...मुझे तो बहुत चकित करती है यह बातकि देह की सँख्याएँ आठ की सँख्या निर्धारित करती हैंक्योंकि आठ तरह से ही मुड़ती है यह देहइसीलिए तो कृष्ण कहलाते हैं अष्टावक्रसात रंग दीखते हैं आँखों कोऔर जीभ छह तरह के स्वादों को पहचानती हैइसीलिए तो भोजन को कहा गया षट्‍रसदेखिए एक से बना कैसा प्यारा शब्दएकाएक जो दूसरे के बिना रह नहीं सकताजिसके बिना सम्भव नहीं थीइस दुनिया की शुरुआतमैंने तो शुरू में ही कही थी यह बातकि सँख्याएँ शब्दों की पूर्वज हैंशब्द तो आए बहुत बाद मेंऔर आते ही चले जा रहे हैंजबकी सँख्याएँ सबकी सब आ चुकी हैंक्या कोई नई सँख्या बता सकते हैं आप ।

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