EPISODE · Apr 14, 2026 · 2 MIN
Sapna Aur Deewaar | Langston Hughes | Translation - Dharamvir Bharti
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सपना और दीवार। लैंग्स्टन ह्यूज़अनुवाद : धर्मवीर भारतीबहुत दिन हो गए!मैं अपने सपने को लगभग भूल चुका था।लेकिन सपना अनश्वर थामेरे सामने,झिलमिलाते हुए सूरज की तरहमेरा सपना!और फिर दीवार उठी,धीरे-धीरे,मेरे और मेरे सपने के बीच।उठती गई धीरे-धीरेमेरे सपने की रोशनी कोधुँधला करते हुए,रोशनी का गला घोंटते हुए!यहाँ तक किआकाश चूमने लगीवह दीवार!दीवार की छाया......मैं काला हूँ...मैं काली छाया में कुलबुला रहा हूँ।मेरे सपनों की रोशनीन मेरे चारों ओर है,न मुझ पर आशीर्वाद-सी छाई है।सिर्फ़ काली पुख़्ता दीवारऔर उसकी कड़वी छाया!ओ मेरे हाथों!मेरी काली मज़बूत भुजाओ!तोड़ दो इस दीवार को,ढूँढ़ लाओ मेरे सपनेइस अँधेरे को चूर-चूर कर दोइस छाँह को चीर कर फेंक दो,सूरज की सहस्रों किरणें धधक उठें!लाल भट्टी की तरह सुलगते हुएलाखों सपनेपवित्र सूरज के!
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सपना और दीवार। लैंग्स्टन ह्यूज़अनुवाद : धर्मवीर भारतीबहुत दिन हो गए!मैं अपने सपने को लगभग भूल चुका था।लेकिन सपना अनश्वर थामेरे सामने,झिलमिलाते हुए सूरज की तरहमेरा सपना!और फिर दीवार उठी,धीरे-धीरे,मेरे और मेरे सपने के बीच।उठती गई धीरे-धीरेमेरे सपने की रोशनी कोधुँधला करते हुए,रोशनी का गला घोंटते हुए!यहाँ तक किआकाश चूमने लगीवह दीवार!दीवार की छाया......मैं काला हूँ...मैं काली छाया में कुलबुला रहा हूँ।मेरे सपनों की रोशनीन मेरे चारों ओर है,न मुझ पर आशीर्वाद-सी छाई है।सिर्फ़ काली पुख़्ता दीवारऔर उसकी कड़वी छाया!ओ मेरे हाथों!मेरी काली मज़बूत भुजाओ!तोड़ दो इस दीवार को,ढूँढ़ लाओ मेरे सपनेइस अँधेरे को चूर-चूर कर दोइस छाँह को चीर कर फेंक दो,सूरज की सहस्रों किरणें धधक उठें!लाल भट्टी की तरह सुलगते हुएलाखों सपनेपवित्र सूरज के!
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Sapna Aur Deewaar | Langston Hughes | Translation - Dharamvir Bharti
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