EPISODE · Jun 16, 2023 · 3 MIN
Shabd Batao, Katha, Akela Mela | Ramesh Chandra Shah
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
रमेशचंद्र शाह - शब्द बताओ कहना क्या हैशब्द बताओ कहना क्या शब्द बताओ गहना क्या है।मेरा तुम्हें तुम्हारा मुझे उलेहना क्या है शब्द बताओ कहना क्यों हैशब्द बताओ सहना क्यों हैतुमने हमको हमने तुमको पहना क्यों है? कथा खुला घर हैएक साँकल भर लगी हैलौट आएगी अभी माँवह गई है कथा सुननेयहीं ठाकुरद्वार!चल रही है कथा अब भीढल रही है कथा अब भीफूल आते फूल जातेबेल सा मुझ पर चढ़ा संसारहाथ साँकल तक पहुँच कर रह गया ठिठकाकिस कथा के बीचकिस कथा के व्योम में छिटकाफूल आते फूल जाते बेल सा मुझपर चढ़ा संसारकहाँ किसकी कथा, कैसी, कहाँ ठाकुरद्वार! अकेला मेला गोद लिए सन्नाटा, देहरी मोह अकेला मेला। गोद लिए सन्नाटा देहरी मोक अकेला मेलाधूप धूल तारों कीपता नहीं यह किसका घर है, किसका खंडहरलहर ले रहा है समुद्र पत्थर काबस इतना ही जुड़ा और इतना ही बिखराझूल रहा हूँ तार तार में आर पार अपने हीचौतरफा बिखरे आलों से झाँक रहा है बचपन!
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रमेशचंद्र शाह - शब्द बताओ कहना क्या हैशब्द बताओ कहना क्या शब्द बताओ गहना क्या है।मेरा तुम्हें तुम्हारा मुझे उलेहना क्या है शब्द बताओ कहना क्यों हैशब्द बताओ सहना क्यों हैतुमने हमको हमने तुमको पहना क्यों है? कथा खुला घर हैएक साँकल भर लगी हैलौट आएगी अभी माँवह गई है कथा सुननेयहीं ठाकुरद्वार!चल रही है कथा अब भीढल रही है कथा अब भीफूल आते फूल जातेबेल सा मुझ पर चढ़ा संसारहाथ साँकल तक पहुँच कर रह गया ठिठकाकिस कथा के बीचकिस कथा के व्योम में छिटकाफूल आते फूल जाते बेल सा मुझपर चढ़ा संसारकहाँ किसकी कथा, कैसी, कहाँ ठाकुरद्वार! अकेला मेला गोद लिए सन्नाटा, देहरी मोह अकेला मेला। गोद लिए सन्नाटा देहरी मोक अकेला मेलाधूप धूल तारों कीपता नहीं यह किसका घर है, किसका खंडहरलहर ले रहा है समुद्र पत्थर काबस इतना ही जुड़ा और इतना ही बिखराझूल रहा हूँ तार तार में आर पार अपने हीचौतरफा बिखरे आलों से झाँक रहा है बचपन!
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Shabd Batao, Katha, Akela Mela | Ramesh Chandra Shah
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