EPISODE · Nov 27, 2024 · 0 MIN
Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 47
from Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 · host Yatrigan kripya dhyan de!
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 47 में श्रीकृष्ण कहते हैं कि अपने स्वभाव के अनुसार निर्धारित धर्म और कर्म करना ही सर्वोत्तम है, भले ही वह दोषपूर्ण क्यों न हो। दूसरे के धर्म का पालन, चाहे वह कितना भी उत्तम हो, अनिष्टकारी हो सकता है। अपने स्वधर्म का पालन करने से मनुष्य पाप में नहीं फंसता। यह श्लोक व्यक्ति को अपनी प्रकृति के अनुसार कर्म करते हुए जीवन जीने की प्रेरणा देता है। Hashtags:#BhagavadGita #Shloka18_47 #Swadharma #KarmaYoga #LifeLesson #SpiritualWisdom #KrishnaTeachings #HinduPhilosophy #DharmaAndKarma #SelfAwareness
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