EPISODE · Dec 12, 2024 · 0 MIN
Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 48
from Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 · host Yatrigan kripya dhyan de!
सहजं कर्म त्याग न करें | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 48 Description:श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 18 के श्लोक 48 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि जन्मजात कर्तव्यों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, भले ही वे दोषयुक्त क्यों न हों। जैसे धुएं से आग ढकी रहती है, वैसे ही सभी कर्म कुछ न कुछ दोषों से ग्रस्त होते हैं। इसलिए, अपने स्वभाव के अनुसार निर्धारित कर्तव्यों का पालन करते रहना ही उचित है। Tags:श्रीमद्भगवद्गीता, भगवद्गीता श्लोक, कर्मयोग, आत्मज्ञान, जीवन के सिद्धांत, कर्तव्य पालन, अर्जुन, श्रीकृष्ण उपदेश, गीता सार, अध्यात्म, भारतीय संस्कृति Hashtags:#श्रीमद्भगवद्गीता #कर्मयोग #भगवद्गीता_श्लोक #कर्तव्य_पालन #आत्मज्ञान #भगवान_श्रीकृष्ण #धर्म_संदेश #भारतीय_संस्कृति #गीता_सार #SpiritualWisdom #LifeLessons #DutyAndDharma
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