EPISODE · Dec 13, 2024 · 0 MIN
Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 49
from Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 · host Yatrigan kripya dhyan de!
असक्त बुद्धि से नैष्कर्म्य सिद्धि | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 49 Description:श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 18 के श्लोक 49 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि जो व्यक्ति आसक्ति रहित होकर आत्म-नियंत्रण के साथ हर जगह शांत रहता है और इच्छाओं से मुक्त होता है, वह संन्यास के मार्ग से परम नैष्कर्म्य सिद्धि (कर्मों के फल से मुक्ति) प्राप्त करता है। यह आत्मिक शांति और मोक्ष प्राप्ति का उच्चतम स्तर है। Tags:श्रीमद्भगवद्गीता, नैष्कर्म्य सिद्धि, संन्यास योग, भगवद्गीता श्लोक, आत्मज्ञान, कर्मयोग, श्रीकृष्ण उपदेश, अध्यात्मिक ज्ञान, भारतीय संस्कृति, मोक्ष मार्ग Hashtags:#श्रीमद्भगवद्गीता #नैष्कर्म्यसिद्धि #संन्यासयोग #कर्मयोग #आत्मज्ञान #भगवद्गीता_श्लोक #श्रीकृष्ण_उपदेश #आध्यात्म #मोक्ष_मार्ग #SpiritualJourney #InnerPeace #SelfRealization #HinduPhilosophy #BhagavadGitaWisdom
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