EPISODE · Dec 15, 2024 · 0 MIN
Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 51
from Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 · host Yatrigan kripya dhyan de!
आत्मसंयम और शुद्ध बुद्धि | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 51 Description:भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 18 के श्लोक 51 में समझाते हैं कि शुद्ध बुद्धि और आत्मसंयम के साथ कैसे आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। इच्छाओं और द्वेष को त्यागकर, आत्मा को नियंत्रित कर और इंद्रियों से दूर रहते हुए मनुष्य परम ज्ञान की ओर बढ़ता है। यह श्लोक आध्यात्मिक साधना और आत्मानुशासन का महत्व दर्शाता है। Tags:श्रीमद्भगवद्गीता, आत्मसंयम, शुद्ध बुद्धि, राग द्वेष, आध्यात्मिक साधना, भगवद्गीता श्लोक, श्रीकृष्ण उपदेश, भारतीय दर्शन, आत्मविकास, आत्मसाक्षात्कार Hashtags:#श्रीमद्भगवद्गीता #आत्मसंयम #शुद्ध_बुद्धि #रागद्वेष_त्याग #आध्यात्मिक_साधना #श्रीकृष्ण_उपदेश #आत्मविकास #आत्मज्ञान #SelfControl #PureIntellect #BhagavadGitaWisdom #SpiritualAwakening #InnerPeace #Mindfulness #SelfDiscipline
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