EPISODE · Apr 25, 2025 · 2 MIN
Sitaron Se Ulajhta Ja Raha Hun | Firaq Gorakhpuri
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सितारों से उलझता जा रहा हूँ | फ़िराक़ गोरखपुरीसितारों से उलझता जा रहा हूँशब-ए-फ़ुरक़त बहुत घबरा रहा हूँयक़ीं ये है हक़ीक़त खुल रही हैगुमाँ ये है कि धोखे खा रहा हूँइन्ही में राज़ हैं गुल-बारियों केमै जो चिंगारियाँ बरसा रहा हूँ तेरे पहलू में क्यों होता है महसूसकि तुझसे दूर होता जा रहा हूँजो उलझी थी कभी आदम के हाथोंवो गुत्थी आज तक सुलझा रहा हूँमोहब्बत अब मोहब्बत हो चली हैतुझे कुछ भूलता-सा जा रहा हूँअजल भी जिनको सुनकर झूमती है वो नग़्मे ज़िन्दगी के गा रहा हूँ ये सन्नाटा है मेरे पाँव की चाप"फ़िराक़" अपनी कुछ आहट पा रहा हूँ
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