EPISODE · Aug 25, 2026 · 10 MIN
[समीक्षा] Bullshit Jobs: A Theory (David Graeber) सारांशित.
from 9Natree Hindi · host 9Natree
Bullshit Jobs: A Theory (David Graeber) - Amazon India Store: https://www.amazon.in/dp/1501143336?tag=9natreehindi-21 - Amazon Worldwide Store: https://global.buys.trade/Bullshit-Jobs%3A-A-Theory-David-Graeber.html - Apple Books: https://books.apple.com/us/audiobook/assholes-a-theory-unabridged/id1416896308?itsct=books_box_link&itscg=30200&ls=1&at=1001l3bAw&ct=9natree - eBay: https://www.ebay.com/sch/i.html?_nkw=Bullshit+Jobs+A+Theory+David+Graeber+&mkcid=1&mkrid=711-53200-19255-0&siteid=0&campid=5339060787&customid=9natree&toolid=10001&mkevt=1 - और पढ़ें: https://hindi.9natree.com/read/1501143336/ #बुलशिटजॉब #फ्लंकी,गूनऔरडक्टटेपर #बॉक्सटिकिंग #कार्यनीतिऔररोजगारपूजा #नौकरशाहीकाविस्तार #BullshitJobs डेविड ग्रेबर की पुस्तक बुलशिट जॉब्स: अ थ्योरी, २०१८ में प्रकाशित कार्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक अर्थबोध पर एक विवादास्पद गैर-कथात्मक अध्ययन है. मानवविज्ञानी ग्रेबर उस अनुभव को केंद्र में रखते हैं जिसमें कोई कर्मचारी स्वयं मानता है कि उसकी वेतनभोगी भूमिका का दुनिया पर कोई उपयोगी असर नहीं पड़ता, फिर भी उसे उस काम को जरूरी दिखाना पड़ता है. उनका तर्क केवल यह नहीं है कि अनेक लोग अपने काम से ऊबते हैं. वे बुलशिट जॉब और कठिन, कम वेतन वाले, या अप्रिय काम के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं. सफाई, देखभाल या मरम्मत का काम कठिन हो सकता है, पर समाज के लिए जरूरी भी हो सकता है. पुस्तक कर्मचारी-गवाहियों, कार्यालयी जीवन के अवलोकनों और पूंजीवाद तथा नौकरशाही की आलोचना के सहारे पूछती है कि उत्पादकता बढ़ने के बावजूद काम के घंटे कम क्यों नहीं हुए. इसका उद्देश्य किसी एक पेशे को अपमानित करना नहीं, बल्कि उपयोगिता, गरिमा और रोजगार को लेकर प्रचलित धारणाओं की जांच करना है.
Embed this episode
Ready to play
[समीक्षा] Bullshit Jobs: A Theory (David Graeber) सारांशित.
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
No similar episodes found.