EPISODE · Sep 15, 2021 · 1H 16M
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 32
from Vedanta Ashram Podcasts · host Vedanta Ashram
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 32वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी ने हनुमानजी से सीता का कुशल-क्षेम पुछा तब उन्होंने अत्यंत मार्मिक शब्दों में सीता के हाल एवं उनका सन्देश रामजी को दिया। यह प्रसंग अत्यंत भाव-प्रधान एवं हृदयस्पर्शी है। सीताजी ने कहा की हमारी तरफ से अनुज समेत रामजी के चरण स्पर्श करना और पूछना की प्रभु तो भक्तवत्सल हैं तो हमें कौन से अपराध के लिए त्याग दिया ? हाँ हमारा एक अपराध है की आप से बिछुड़ते हमारे प्राण नहीं निकले लेकिन प्रभु शरीर की विरह अग्नि को हमारे आंसू बोझा देते हैं - जलने ही नहीं देते हैं। बाद में हनुमानजी रामजी से निवेदन करते हैं की प्रभु अब तो हमें जल्दी से जल्दी चलना चाहिए।
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