EPISODE · Aug 20, 2021 · 1H 7M
सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 6
from Vedanta Ashram Podcasts · host Vedanta Ashram
सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के छठे दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया की हनुमानजी की लंका की यात्रा एक साधक की भक्ति माता के दर्शन की यात्रा है। किसी भी यात्रा में कोई न कोई अच्छे या बुरे अवरोध आने स्वाभाविक हैं। हनुमानजी को सबसे पहले मैनाक पर्वत मिले। वे उनके पिताजी (पवन देवता) के ऋणी थे, वे पूरी आत्मीयता के साथ हनुमानजी की सेवा के भाव से रस्ते में सामने खड़े हो जाते हैं और उन्हें कुछ देर का विश्राम करने के लिए अपने हरे-भरे पर्वत पर आमंत्रित करते हैं। हनुमानजी उनकी भावना देख कर बड़ी आत्मीयता से उनकी सेवा स्वीकारते हुए मात्र उनके द्वारा दिए गए फल-फूलों को स्पर्श करते हुए कहते हैं की हमें अभी कोई थकावट नहीं है, वस्तुतः हम जब अपने प्रभु श्री राम जी का कार्य पूरा कर लेंगें तभी विश्राम लेंगे।
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