EPISODE · Mar 13, 2024 · 2 MIN
Surya Dhalta Hi Nahi | Ramdarash Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
सूर्य ढलता ही नहीं | रामदरश मिश्र | आरती जैनचाहता हूँ, कुछ लिखूँ, पर कुछ निकलता ही नहीं हैदोस्त, भीतर आपके कोई विकलता ही नहीं है!आप बैठे हैं अंधेरे में लदे टूटे पलों सेबंद अपने में अकेले, दूर सारी हलचलों सेहैं जलाए जा रहे बिन तेल का दीपक निरन्तरचिड़चिड़ाकर कह रहे- ‘कम्बख़्त, जलता ही नहीं है!’बदलियाँ घिरतीं, हवाएँ काँपती, रोता अंधेरालोग गिरते, टूटते हैं, खोजते फिरते बसेराकिन्तु रह-रहकर सफ़र में, गीत गा पड़ता उजालायह कला का लोक, इसमें सूर्य ढलता ही नहीं है!तब लिखेंगे आप जब भीतर कहीं जीवन बजेगादूसरों के सुख-दुःखों से आपका होना सजेगाटूट जाते एक साबुत रोशनी की खोज में जोजानते हैं- ज़िन्दगी केवल सफ़लता ही नहीं है!बात छोटी या बड़ी हो, आँच में ख़ुद की जली होदूसरों जैसी नहीं, आकार में निज के ढली होहै अदब का घर, सियासत का नहीं बाज़ार यह तोझूठ का सिक्का चमाचम यहाँ चलता ही नहीं है!
What this episode covers
सूर्य ढलता ही नहीं | रामदरश मिश्र | आरती जैनचाहता हूँ, कुछ लिखूँ, पर कुछ निकलता ही नहीं हैदोस्त, भीतर आपके कोई विकलता ही नहीं है!आप बैठे हैं अंधेरे में लदे टूटे पलों सेबंद अपने में अकेले, दूर सारी हलचलों सेहैं जलाए जा रहे बिन तेल का दीपक निरन्तरचिड़चिड़ाकर कह रहे- ‘कम्बख़्त, जलता ही नहीं है!’बदलियाँ घिरतीं, हवाएँ काँपती, रोता अंधेरालोग गिरते, टूटते हैं, खोजते फिरते बसेराकिन्तु रह-रहकर सफ़र में, गीत गा पड़ता उजालायह कला का लोक, इसमें सूर्य ढलता ही नहीं है!तब लिखेंगे आप जब भीतर कहीं जीवन बजेगादूसरों के सुख-दुःखों से आपका होना सजेगाटूट जाते एक साबुत रोशनी की खोज में जोजानते हैं- ज़िन्दगी केवल सफ़लता ही नहीं है!बात छोटी या बड़ी हो, आँच में ख़ुद की जली होदूसरों जैसी नहीं, आकार में निज के ढली होहै अदब का घर, सियासत का नहीं बाज़ार यह तोझूठ का सिक्का चमाचम यहाँ चलता ही नहीं है!
NOW PLAYING
Surya Dhalta Hi Nahi | Ramdarash Mishra
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
Jun 23, 2026 ·12m
Jun 22, 2026 ·26m
Jun 20, 2026 ·60m