EPISODE · Aug 7, 2021 · 28 MIN
स्वर्ग से उतरी जीवन की जीवन्त रोटी येसु | योहन (John) 6:34-58 पर मनन-चिंतन | Jesus, the Living Bread that came down from heaven
from Greater Glory of God · host FR. C. GEORGE MARY CLARET
#dailybible #bible #bibleversefortoday #bibleverse स्वर्ग से उतरी जीवन की जीवन्त रोटी येसु | योहन (John) 6:34-58 पर मनन-चिंतन | Jesus, the Living Bread that came down from heaven The Holy Eucharist is the Source and Summit of Christian Life. The Holy Eucharist is Jesus Himself. Jesus, the Living Lord, is 'truly, really, and substantially' present through the Holy Eucharist. The Real Presence of Jesus is described as Jesus is present in body and blood, soul and divinity. The entire Person of Jesus Christ is present. The Holy Eucharist is the greatest gift because through this God-becomes-one-with-us. That's why it is called Holy Communion. जीवन की रोटी मैं हूँ 34) लोगों ने ईसा से कहा, "प्रभु! आप हमें सदा वही रोटी दिया करें"। 35) उन्होंने उत्तर दिया, "जीवन की रोटी मैं हूँ। जो मेरे पास आता है, उसे कभी भूख नहीं लगेगी और जो मुझ में विश्वास करता है, उसे कभी प्यास नहीं लगेगी। 36) फिर भी, जैसा कि मैंने तुम लोगों से कहा, तुम मुझे देख कर भी विश्वास नहीं करते। 37) पिता जिन्हें मुझ को सौंप देता है, वे सब मेरे पास आयेंगे और जो मेरे पास आता है, मैं उसे कभी नहीं ठुकराऊँगा ; 38) क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, बल्कि जिसने मुझे भेजा, उसकी इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्ग से उतरा हूँ। 39) जिसने मुझे भेजा, उसकी इच्छा यह है कि जिन्हें उसने मुझे सौंपा है, मैं उन में से एक का भी सर्वनाश न होने दूँ, बल्कि उन सब को अन्तिम दिन पुनर्जीवित कर दूँ। 40) मेरे पिता की इच्छा यह है कि जो पुत्र को पहचान कर उस में विश्वास करता है, उसे अनन्द जीवन प्राप्त हो। मैं उसे अन्तिम दिन पुनर्जीवित कर दूँगा। 41) ईसा ने कहा था, "स्वर्ग से उतरी हुई रोटी मैं हूँ"। इस पर यहूदी यह कहते हुए भुनभुनाते थे, 42) "क्या वह यूसुफ़ का बेटा ईसा नहीं है? हम इसके माँ-बाप को जानते हैं। तो यह कैसे कह सकता है- मैं स्वर्ग से उतरा हूँ?" 43) ईसा ने उन्हें उत्तर दिया, "आपस में मत भुनभुनाओ। 44) कोई मेरे पास तब तक नहीं आ सकता, जब तक कि पिता, जिसने मुझे भेजा, उसे आकर्षित नहीं करता। मैं उसे अन्तिम दिन पुनर्जीवित कर दूंगा। 45) नबियों ने लिखा है, वे सब-के-सब ईश्वर के शिक्षा पायेंगे। जो ईश्वर की शिक्षा सुनता और ग्रहण करता है, वह मेरे पास आता है। 46) "यह न समझो कि किसी ने पिता को देखा है; जो ईश्वर की ओर से आया है, उसी ने पिता को देखा है 47) मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ - जो विश्वास करता है, उसे अनन्त जीवन प्राप्त है। 48) जीवन की रोटी मैं हूँ। 49) तुम्हारे पूर्वजों ने मरुभूमि में मन्ना खाया, फिर भी वे मर गये। 50) मैं जिस रोटी के विषय में कहता हूँ, वह स्वर्ग से उतरती है और जो उसे खाता है, वह नहीं मरता। 51) स्वर्ग से उतरी हुई वह जीवन्त रोटी मैं हूँ। यदि कोई वह रोटी खायेगा, तो वह सदा जीवित रहेगा। जो रोटी में दूँगा, वह संसार के लिए अर्पित मेरा मांस है।" 52) यहूदी आपस में यह कहते हुए वाद विवाद कर रहे थे, "यह हमें खाने के लिए अपना मांस कैसे दे सकता है?" =================================== You are most welcome to follow me on the following platforms. =================================== To understand the Incarnation (the Word made flesh), try this book by Fr. C. George Mary Claret "God’s Journey to Bethlehem: God's Way of Alluring You to Enter Into Your Heart" https://geni.us/nnB5 Connect him on http://bit.ly/WebGGOG Facebook Personal http://bit.ly/FacebookGeo Group http://bit.ly/GGOGFB Amazon Author Page http://bit.ly/FrGeorge Twitter http://bit.ly/TweetGMC YouTube Hindi Channel https://bit.ly/3yff7ef English Channel http://bit.ly/EngYTube Instagram http://bit.ly/InstaGMC LinkedIn http://bit.ly/LInGMC Medium http://bit.ly/MedGMC Pinterest http://bit.ly/PinCGMC Tumblr http://bit.ly/TumCGMC
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