EPISODE · Aug 15, 2024 · 1 MIN
Swadesh Ke Prati | Subhadra Kumari Chauhan
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
स्वदेश के प्रति / सुभद्राकुमारी चौहानआ, स्वतंत्र प्यारे स्वदेश आ,स्वागत करती हूँ तेरा।तुझे देखकर आज हो रहा,दूना प्रमुदित मन मेरा॥आ, उस बालक के समानजो है गुरुता का अधिकारी।आ, उस युवक-वीर सा जिसकोविपदाएं ही हैं प्यारी॥आ, उस सेवक के समान तूविनय-शील अनुगामी सा।अथवा आ तू युद्ध-क्षेत्र मेंकीर्ति-ध्वजा का स्वामी सा॥आशा की सूखी लतिकाएंतुझको पा, फिर लहराईं।अत्याचारी की कृतियों कोनिर्भयता से दरसाईं॥
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स्वदेश के प्रति / सुभद्राकुमारी चौहानआ, स्वतंत्र प्यारे स्वदेश आ,स्वागत करती हूँ तेरा।तुझे देखकर आज हो रहा,दूना प्रमुदित मन मेरा॥आ, उस बालक के समानजो है गुरुता का अधिकारी।आ, उस युवक-वीर सा जिसकोविपदाएं ही हैं प्यारी॥आ, उस सेवक के समान तूविनय-शील अनुगामी सा।अथवा आ तू युद्ध-क्षेत्र मेंकीर्ति-ध्वजा का स्वामी सा॥आशा की सूखी लतिकाएंतुझको पा, फिर लहराईं।अत्याचारी की कृतियों कोनिर्भयता से दरसाईं॥
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