EPISODE · Aug 5, 2025 · 2 MIN
Swapn Me Bhi Swapn Ke Bahar | Adnan Kafeel Darwesh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
स्वप्न में भी स्वप्न के बाहर | अदनान कफ़ील दरवेश सोचो तोघर भी एक गुल्लक है।जिसमें बजते हैंतरल-ठोस दिनखड़-खड़ उदास...कागज़ हैं दीवारेंजिन्हें सोख लिया हैढेर सारे समय का बजता पानीअहाते में हैंइमली और अमरूद के चमकदार दरख़्तदो बुज़ुर्गों की तरह खड़ेशायद बच्चे होंबुत बनेकिसी बरहम हुए खेल के बीचरेहल पर धरा है कलाम-पाकहरे ग़िलाफ़ में बन्दरोककर समय की धारदीवार घड़ीमुँह फेरे टँगी हैअलमारी के थोड़ा-सा ऊपर एक रहस्यमयी ख़ुशबू का झोंकाहवा के साथ उड़ता हुआपास से गुज़र जाता हैरौशनदान से झरती है चाँदनीअचरज की तरहमैं भटकता हूँ मुँह-अँधेरेकिसी और समय मेंचुपचाप...घर एक द्वीप हैसमंदर मेंदूर से चमकताअजगर की गुंजलकों में कसामैं स्वप्न में भीस्वप्न के बाहरबुरी तरह हाँफता...
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