Swapn Mein Pita | Ghulam Mohammad Sheikh episode artwork

EPISODE · May 12, 2025 · 2 MIN

Swapn Mein Pita | Ghulam Mohammad Sheikh

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

स्वप्न में पिता | ग़ुलाम मोहम्मद शेख़बापू, कल तुम फिर से दिखेघर से हज़ारों योजन दूर यहाँ बाल्टिक के किनारेमैं लेटा हूँ यहीं,खाट के पास आकर खड़े आप इस अंजान भूमि परभाइयों में जब सुलह करवाईतब पहना था वही थिगलीदार, मुसा हुआ कोट,दादा गए तब भी शायद आप इसी तरह खड़े होंगेअकेले दादा का झुर्रीदार हाथ पकड़।आप काठियावाड़ छोड़कर कब से यहाँ क्रीमिया केशरणार्थियों के बीच आ बसे?भोगावो छोड़, भादर लाँघरोमन क़िले की कगार चढ़डाकिए का थैला कंधे पर लटकाए आप यहाँ तक चले आए—पीछे तो देखो दौड़ आया है क़ब्रिस्तान!(हर क़ब्रिस्तान में मुझे आपकी ही क़ब्र क्यो दिखाई पड़ती है?)और ये पीछे-पीछे दौड़े आ रहे हैं भाई(क्या झगड़ा अभी निपटा नहीं?)पीछे लकड़ी के सहारेखड़े क्षितिज के चरागाह मेंमोतियाबिंद के बीच मेरी खाट ढूँढ़ती माँ।माँ, मुझे भी नहीं दिखताअब तक हाथ में थावह बचपन यहीं कहींखाट के नीचे टूटकर बिखर गया है।

स्वप्न में पिता | ग़ुलाम मोहम्मद शेख़बापू, कल तुम फिर से दिखेघर से हज़ारों योजन दूर यहाँ बाल्टिक के किनारेमैं लेटा हूँ यहीं,खाट के पास आकर खड़े आप इस अंजान भूमि परभाइयों में जब सुलह करवाईतब पहना था वही थिगलीदार, मुसा हुआ कोट,दादा गए तब भी शायद आप इसी तरह खड़े होंगेअकेले दादा का झुर्रीदार हाथ पकड़।आप काठियावाड़ छोड़कर कब से यहाँ क्रीमिया केशरणार्थियों के बीच आ बसे?भोगावो छोड़, भादर लाँघरोमन क़िले की कगार चढ़डाकिए का थैला कंधे पर लटकाए आप यहाँ तक चले आए—पीछे तो देखो दौड़ आया है क़ब्रिस्तान!(हर क़ब्रिस्तान में मुझे आपकी ही क़ब्र क्यो दिखाई पड़ती है?)और ये पीछे-पीछे दौड़े आ रहे हैं भाई(क्या झगड़ा अभी निपटा नहीं?)पीछे लकड़ी के सहारेखड़े क्षितिज के चरागाह मेंमोतियाबिंद के बीच मेरी खाट ढूँढ़ती माँ।माँ, मुझे भी नहीं दिखताअब तक हाथ में थावह बचपन यहीं कहींखाट के नीचे टूटकर बिखर गया है।

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Swapn Mein Pita | Ghulam Mohammad Sheikh

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This episode is 2 minutes long.

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This episode was published on May 12, 2025.

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स्वप्न में पिता | ग़ुलाम मोहम्मद शेख़बापू, कल तुम फिर से दिखेघर से हज़ारों योजन दूर यहाँ बाल्टिक के किनारेमैं लेटा हूँ यहीं,खाट के पास आकर खड़े आप इस अंजान भूमि परभाइयों में जब सुलह करवाईतब पहना था वही थिगलीदार, मुसा हुआ कोट,दादा गए तब भी शायद आप...

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