EPISODE · Jun 27, 2026 · 2 MIN
Swaron Ka Samarpan | Shrikant Verma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
स्वरों का समर्पण । श्रीकांत वर्माडबडब अँधेरे में, समय की नदी मेंअपने-अपने दिये सिरा दो;शायद कोई दिया क्षितिज तक जा,सूरज बन जाए!!हरसिंगार जैसे यदि चुए कहीं तारे,अगर कहीं शीश झुकाबैठे हों मेड़ों परपंथी पथहारे,अगर किसी घाटी भटकी हों छायाएँ,अगर किसी मस्तक परजर्जर हों जीवन कीत्रिपथगा ऋचाएँ;पीड़ा की यात्रा के ओ पूरब-यात्री!अपनी यह नन्हीं-सी आस्था तिरा दोशायद यह आस्था किसी प्रिय कोतट तक ले जाए!!
What this episode covers
स्वरों का समर्पण । श्रीकांत वर्माडबडब अँधेरे में, समय की नदी मेंअपने-अपने दिये सिरा दो;शायद कोई दिया क्षितिज तक जा,सूरज बन जाए!!हरसिंगार जैसे यदि चुए कहीं तारे,अगर कहीं शीश झुकाबैठे हों मेड़ों परपंथी पथहारे,अगर किसी घाटी भटकी हों छायाएँ,अगर किसी मस्तक परजर्जर हों जीवन कीत्रिपथगा ऋचाएँ;पीड़ा की यात्रा के ओ पूरब-यात्री!अपनी यह नन्हीं-सी आस्था तिरा दोशायद यह आस्था किसी प्रिय कोतट तक ले जाए!!
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