EPISODE · Feb 3, 2025 · 1 MIN
Tabdili | Akhtarul Iman
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तब्दीली | अख़्तरुल ईमानइस भरे शहर में कोई ऐसा नहींजो मुझे राह चलते को पहचान लेऔर आवाज़ दे ओ बे ओ सर-फिरेदोनों इक दूसरे से लिपट कर वहींगिर्द-ओ-पेश और माहौल को भूल करगालियाँ दें हँसें हाथा-पाई करेंपास के पेड़ की छाँव में बैठ करघंटों इक दूसरे की सुनें और कहेंऔर इस नेक रूहों के बाज़ार मेंमेरी ये क़ीमती बे-बहा ज़िंदगीएक दिन के लिए अपना रुख़ मोड़ ले
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Tabdili | Akhtarul Iman
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