Tedhi Kamar KI Auratein | Aishwarya Vijay Amrit Raj episode artwork

EPISODE · Mar 12, 2024 · 4 MIN

Tedhi Kamar KI Auratein | Aishwarya Vijay Amrit Raj

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

टेढ़ी कमर की औरतें | ऐश्वर्य विजय अमृत राजछः-सात साल की लड़कियाँछोटे भाइयों/बड़े भाई के बच्चे के साथ/सोलह साल कीसालभर पुरानी कन्याएँअपने बच्चे/जेठानी के बच्चे के साथचालीस-साठ की दादी/नानीकमर एक तरफ निकालकरबच्चे को लटकाए कुल्हे की हड्डी से, हो जाती हैं पेड़ के किसी टेढ़े तने सी तिरछी, और ठोंस, किसी पुरानी सभ्यता की मूर्ति सी,जो टिकी-बची हो हर मौसम व समय की मार से।कमर टेढ़ी किये ये औरतें धड़फड़ा कर चढ़ जाती हैं कई सीढ़ियाँ एक साथहल्के कदम से टहलत जाती हैं गाँव के एक छोर से दूसरे छोर तक,झुककर उठा लेती हैं सारे बर्तन,उचक कर चढ़ा देती हैं सबसे ऊपर की दराज़ पर मसाले के डिब्बे,सरकस के सारे करतब निभा लेंगी ये औरतें, कमर से दो हाँथ जितने बड़े बच्चे लटकाये अपने शरीर से किसी भी दिन..'कर्मा' की रात तेज़ी से लगाती हैं दुब घास से भरी बाल्टी के चक्करखाली पेट, गाते हुए भाइयों की सलामती के लिए माँ व गाँव की अन्य औरतों से सीखे हुए गीत,मायके लौटी लड़कियाँ नाचती हैं शर्मीली सखी की बाँह खींचते हुए,कहती हैं, "अब त अलगे साल अयते ई मौका"गाते हुए गीत,वे मन से भूल जातीं हैं वे सारे तिरस्कार जो मिलते हैं उसे औरत के शरीर में 'बहन' होने के कारण,गीत जो करते हैं केवल भाईयों के गुणवान, उनके अस्तित्व की स्तुति,उनकी धुन पर पिटती हैं चूड़ियाँ खनका-खनका तालियाँ…साल भर की आज़ादी इस एक पल में जीते हुएससुराल लौटने का ख़्याल, छः बजते ही किबाड़ से अंदर हो जाने के नियम, सभी को डाल बाल्टी मेंइस रात नाच लेना चाहती हैं कुछ मिनटों में इतना कि दुखे पैर अगली सुबह तक…ताकि इस दर्द को हर दिन याद करें और खुश हो लें उसके पैर जब ससुराल में रखें जाएँ नाप-तौल कर।दोपहर की धूप में जीप खड़ी कर ड्राइवर पसीने से लथपथ मन ही मन कोस रहा है औरतों की जमात कोलड़की धीरे धीरे बढ़ती है जीप की तरफ,माँ बार-बार पोंछती है अपने आँसूउसके बच्चों का मामाकभी पुचकार करकभी आँखें दिखाकररख देता है जीप की सीट पर बैठे जीजा की गोद में बच्चे को,पिता इशारे में कहता है लड़की को बन्द करने जीप का दरवाज़ागाड़ी स्टार्ट करते हुए ड्राइवर लेता है लम्बी साँसगहरी सांस छोड़ती है ससुराल लौटती लड़की।गाँव भर की औरतें जो खड़ी थीं गाड़ी को घेरेहटने लगतीं हैं एक-एक करऔर कमर से अलग-अलग रिश्तों के बच्चे लटकायेऔरतेंऔरतें लग जातीं हैं अपने अपने कामों में।

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