EPISODE · Aug 1, 2025 · 7 MIN
To Frau Gertrud
from SyllabuswithRohit · host SyllabuswithRohit
मेरे किले के सबसे छुपे हुए कमरे में, तंग खिड़की के नीचे, तुम अक्सर बैठती हो— मेरे मरे हुए दोस्तों में सबसे प्यारी दोस्त। तुम्हारा यह प्यारा और अनोखा एहसास अब भी ज़िंदा है, उन दिनों से भी ज़्यादा, जब हम हाथ पकड़कर साथ होते थे। जैसे कोई तारा बुझ जाने के बाद भी सदियों तक रोशनी देता रहता है।मैं नहीं गिन सकता, कि मैंने कितनी बार अपनी नई ज़िंदगी के आसमान के नीचे चक्कर लगाए हैं। मैं नहीं गिन सकता कि कितनी बार मैं उदास हुआ हूँ, क्योंकि मुझे तुम्हारे जैसा कोई नहीं मिला। दुनिया की कोई सुंदरता तुम्हारी सुंदरता से बराबरी नहीं कर सकती।कई बार मैं सोचता हूँ, शायद वह तुम ही थी जिसे दांते ने सड़क पर देखा था। शायद मेरी जवानी के सपनों में तुम फिर से आई थी। मैंने तुम्हें अपनी आँखों से देखा, तुम्हारा हाथ पकड़ा, तुम्हारे कदमों की आवाज़ सुनी। क्या यह सब भगवान का दिया तोहफ़ा नहीं है? क्या यह हमेशा की सुंदरता का रास्ता नहीं है?रात को सपनों में मैं तुम्हें अक्सर देखता हूँ। तुम्हारी गोरी, सुंदर उंगलियाँ पियानो बजाती दिखती हैं। या फिर तुम्हें शाम के वक्त देखता हूँ, जब तुम आसमान के रंग बदलते हुए देखती थी, और तुम्हारी आँखों में खूबसूरती का अनोखा ज्ञान था।इन आँखों ने मेरी कला के बहुत से सपने जगाए हैं। ये आँखें मेरी ज़िंदगी का सबसे कीमती तोहफ़ा हैं। ये खूबसूरती और सच्चाई के तारे हैं। इन आँखों के बिना नाम, पैसा, तारीफ़ सब बेकार हैं।दिन शोर और मुश्किलों से भरा होता है। दिन बच्चों और सिपाहियों के लिए होता है। हर दिन की ज़िंदगी अधूरी है। लेकिन हर रात एक घर लौटने जैसा है, जहाँ हम भगवान की आवाज़ें सुन सकते हैं।तुमने मुझे घर लौटना सिखाया था। जब तुम्हारे लिए स्वर्ग का दरवाज़ा खुलने वाला था, तुमने कहा था: "रात को पवित्र समझो। अपने घर से रात की चुप्पी को कभी मत भगाओ। और तारों को कभी मत भूलना, क्योंकि तारे अमरता के सबसे बड़े प्रतीक हैं।"एक और बार तुमने कहा था: "मेरे जाने के बाद भी औरतों का आदर करना, क्योंकि वे सारे रहस्यों के सबसे करीब होती हैं।" तब से मैंने तारों और औरतों के साथ बिना शब्दों की बातें की हैं।जब हमारी दोस्ती खत्म होने लगी, तो एक और अदृश्य दोस्त हमारे साथ आ गया। उसने मुझे आशीर्वाद दिया और कहा, "अब तुम्हारी खुशी आ गई है।" वह दोस्त तब से मेरे साथ है। उसने कई बार मेरी मदद की।कई बार जब मैं गलत करने वाला था, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। कई बार मैं सुंदर चीज़ों को अनदेखा करके गुज़र रहा था, तो उसने मुझे रोककर पीछे मुड़ने को कहा। कई बार जब मैं कच्चे फल तोड़ने वाला था, तो उसने कहा, "रुको!"उस दिन के बाद से सारी सुंदर और मीठी चीज़ें मुझे साफ़-साफ़ दिखने लगीं। नदियाँ रात में साफ़ आवाज़ में बोलने लगीं। तारों के आने-जाने की मुझे पूरी खबर रहने लगी।मेरा वह दोस्त, जो दिखाई नहीं देता, एक दिन मेरे पास तब आया, जब मेरा दिल बहुत उदास था, और मेरी आँखें अंधी हो गई थीं। उसने मेरा माथा सहलाया, मेरे कान में कुछ कहा, और मेरा हाथ दबाया।लेकिन तुम फूलों के बिस्तर पर शांत लेटी थी, सुंदर, लेकिन ठंडी और सफेद। तुम नहीं हिली। तुम्हारा हाथ नहीं हिला।मेरे लिए वह वक्त एक काली रात जैसा था। मैं बिलकुल अंधेरे में खड़ा था, कुछ भी नहीं दिख रहा था, बस अपने ठंडे हाथ महसूस कर रहा था। तब मेरे उस दोस्त ने मुझे गले लगाया, और मेरा सिर ऊपर उठाया।अचानक, घने अंधेरे में मैंने एक तारा देखा— बहुत सुंदर और शांत। उस तारे को देखकर मुझे याद आया, एक शाम मैं तुम्हारे साथ जंगल में चल रहा था। मेरा हाथ तुम्हारी कमर पर था। अचानक मैंने तुम्हें अपने पास खींचा, और तुम्हारे चेहरे पर कई चुंबन किए। तुम घबरा गई थी, तुमने मुझे हटाया, और कहा था: "नहीं, मेरे प्यारे! मुझे तुम्हारे लिए इस तरह नहीं बनाया गया है। जल्दी ही वह दिन आएगा जब तुम्हारे होंठ और हाथ मुझे नहीं छू पाएंगे। लेकिन तब मैं तुम्हारे ज़्यादा करीब रहूँगी।"अब वह दिन आ गया था। तुम्हारी निकटता मुझे बहुत मीठी लग रही थी। यह ऐसा प्यार था जो खत्म नहीं होता।तुम्हारी मौत के बहुत बाद भी, कई बार मैं उन जगहों पर गया जहाँ हम साथ थे। एक बार जंगल में, तुम मुझे दिखी, पहाड़ से नीचे आ रही थी। तुमने हाथ हिलाया और चली गई। तुम्हें देखकर मेरा दिल खुशी से भर गया।लेकिन तुम सबसे ज़्यादा मेरे सपनों में दिखी। मेरी सबसे बड़ी उदासी के दिन की तरह, तुम आध्यात्मिक सुंदरता के साथ एक प्यारे तारे की तरह आई।
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