EPISODE · Apr 9, 2020 · 0 MIN
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मैं गांव हूं बोल रहा हूं , अपनी पोले खोल रहा हूं , मैं भी कभी तुम्हारी तरह नौजवान था, मेरा भी रंग लाल था, मुझ पर भी खुसियां मरती थी, पूरे दिन काम, और पूरी रात आराम था, आज पूरी रात काम है, और कहीं पूरा दिन आराम है,
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मैं गांव हूं बोल रहा हूं , अपनी पोले खोल रहा हूं , मैं भी कभी तुम्हारी तरह नौजवान था, मेरा भी रंग लाल था, मुझ पर भी खुसियां मरती थी, पूरे दिन काम, और पूरी रात आराम था, आज पूरी रात काम है, और कहीं पूरा दिन आराम है,
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