EPISODE · Oct 30, 2023 · 1 MIN
Tum Rehna Nayan | Ajay Jugran
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तुम रहना नयन | अजय जुगरान जीवन के अंतिम क्षण मेंजब काल बाँधें हथेलियाँएकटक जब हों पुतलियाँएकांत शयन मेंतुम रहना नयन में!जब टूटता श्वास खोले नई पहेलियाँऔर मन लौटे विस्मृत बचपन मेंखेलने संग ले सब सखा सहेलियाँउस खेल के अंतिम क्षण मेंतुम रहना नयन में!जब यम अथक बहेलियाजाल डाल घर उपवन मेंले जाए तन की सब तितलियाँसूदूर गगन मेंतुम रहना नयन में!जीवन के अंतिम क्षण मेंजब क्षण की चमक हो क्षण में तमसजब रुके जैसे रुके श्वास तब बसएकांत शयन मेंतुम रहना नयन में!
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तुम रहना नयन | अजय जुगरान जीवन के अंतिम क्षण मेंजब काल बाँधें हथेलियाँएकटक जब हों पुतलियाँएकांत शयन मेंतुम रहना नयन में!जब टूटता श्वास खोले नई पहेलियाँऔर मन लौटे विस्मृत बचपन मेंखेलने संग ले सब सखा सहेलियाँउस खेल के अंतिम क्षण मेंतुम रहना नयन में!जब यम अथक बहेलियाजाल डाल घर उपवन मेंले जाए तन की सब तितलियाँसूदूर गगन मेंतुम रहना नयन में!जीवन के अंतिम क्षण मेंजब क्षण की चमक हो क्षण में तमसजब रुके जैसे रुके श्वास तब बसएकांत शयन मेंतुम रहना नयन में!
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