EPISODE · Jul 17, 2025 · 2 MIN
Tumhari Kavita | Abha Bodhisattva
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
तुम्हारी कविता | आभा बोधिसत्त्वतुम्हारी कविता से जानती हूँतुम्हारे बारे मेंतुम सोचते क्या हो ,कैसा बदलाव चाहते होकिस बात से होते हो आहत;किस बात से खुशतुम्हारा कोई बायोडटा नहीं मेरे पासफिर भी जानती हूँ मैंतुम्हें तुम्हारी कविताओं सेक्या यह बडी़ बात नही किनहीं जानती तुम्हारा देश ,तुम्हारी भाषा तुम्हारे लोगमैं कुछ भी नहीं जानती,फिर भी कितना कुछ जानती हूँतुम्हारे बारे मेंतुम्हारे घर के पास एकजंगल हैउस में एक झाड़ीहै अजीबजिस में लगता हैएक चाँद-फल रोज़ जिसके नीचे रोती हैविधवाएँ रात भरदिन भर माँजती हैघरों के बर्तनबुहारती हैं आकाश मार्गकि कब आएगा तारन हारऐसे ही चल रहा हैउस जंगल मेंबताती है तुम्हारी कविताकि सपनों को जोड़ कर बुनते हो एक ताराऔर उसे समुद्र में डुबो देते हो।
What this episode covers
तुम्हारी कविता | आभा बोधिसत्त्वतुम्हारी कविता से जानती हूँतुम्हारे बारे मेंतुम सोचते क्या हो ,कैसा बदलाव चाहते होकिस बात से होते हो आहत;किस बात से खुशतुम्हारा कोई बायोडटा नहीं मेरे पासफिर भी जानती हूँ मैंतुम्हें तुम्हारी कविताओं सेक्या यह बडी़ बात नही किनहीं जानती तुम्हारा देश ,तुम्हारी भाषा तुम्हारे लोगमैं कुछ भी नहीं जानती,फिर भी कितना कुछ जानती हूँतुम्हारे बारे मेंतुम्हारे घर के पास एकजंगल हैउस में एक झाड़ीहै अजीबजिस में लगता हैएक चाँद-फल रोज़ जिसके नीचे रोती हैविधवाएँ रात भरदिन भर माँजती हैघरों के बर्तनबुहारती हैं आकाश मार्गकि कब आएगा तारन हारऐसे ही चल रहा हैउस जंगल मेंबताती है तुम्हारी कविताकि सपनों को जोड़ कर बुनते हो एक ताराऔर उसे समुद्र में डुबो देते हो।
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