EPISODE · Sep 3, 2024 · 1 MIN
Us Roz Bhi | Achal Vajpeyi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
उस रोज़ भी | अचल वाजपेयी उस रोज़ भी रोज़ की तरहलोग वह मिट्टी खोदते रहेजो प्रकृति से वंध्या थीउस आकाश की गरिमा परप्रार्थनाएँ गाते रहेजो जन्मजात बहरा थाउन लोगों को सौंप दी यात्राएँजो स्वयं बैसाखियों के आदी थेउन स्वरों को छेड़ाजो सदियों से मात्र संवादी थेपथरीले द्वारों परदस्तकों का होना भर थावह न होने का प्रारंभ था
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उस रोज़ भी | अचल वाजपेयी उस रोज़ भी रोज़ की तरहलोग वह मिट्टी खोदते रहेजो प्रकृति से वंध्या थीउस आकाश की गरिमा परप्रार्थनाएँ गाते रहेजो जन्मजात बहरा थाउन लोगों को सौंप दी यात्राएँजो स्वयं बैसाखियों के आदी थेउन स्वरों को छेड़ाजो सदियों से मात्र संवादी थेपथरीले द्वारों परदस्तकों का होना भर थावह न होने का प्रारंभ था
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