EPISODE · Jan 8, 2024 · 2 MIN
Vastutah | Bhawani Prasad Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
वस्तुतः | भवानी प्रसाद मिश्रमैं जो हूँमुझे वही रहना चाहिए।यानीवन का वृक्षखेत की मेंड़नदी की लहरदूर का गीतव्यतीतवर्तमान मेंउपस्थित भविष्य मेंमैं जो हूँमुझे वही रहना चाहिएतेज़ गर्मीमूसलाधार वर्षाकड़ाके की सर्दीख़ून की लालीदूब का हरापनफूल की जर्दीमैं जो हूँमुझे वही रहना चाहिएमुझे अपनाहोनाठीक-ठीक सहना चाहिएतपना चाहिएअगर लोहा हूँतो हल बनने के लिएबीज हूँतो गड़ना चाहिएफल बनने के लिएमैं जो हूँमुझे वही बनना चाहिएधारा हूँ अन्तःसलिलातो मुझे कुएँ के रूप मेंखनना चाहिएठीक ज़रूरतमन्द हाथों सेगान फैलाना चाहिए मुझेअगर मैं आसमान हूँमगर मैंकब से ऐसा नहींकर रहा हूँजो हूँवही होने से डर रहा हूँ!
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वस्तुतः | भवानी प्रसाद मिश्रमैं जो हूँमुझे वही रहना चाहिए।यानीवन का वृक्षखेत की मेंड़नदी की लहरदूर का गीतव्यतीतवर्तमान मेंउपस्थित भविष्य मेंमैं जो हूँमुझे वही रहना चाहिएतेज़ गर्मीमूसलाधार वर्षाकड़ाके की सर्दीख़ून की लालीदूब का हरापनफूल की जर्दीमैं जो हूँमुझे वही रहना चाहिएमुझे अपनाहोनाठीक-ठीक सहना चाहिएतपना चाहिएअगर लोहा हूँतो हल बनने के लिएबीज हूँतो गड़ना चाहिएफल बनने के लिएमैं जो हूँमुझे वही बनना चाहिएधारा हूँ अन्तःसलिलातो मुझे कुएँ के रूप मेंखनना चाहिएठीक ज़रूरतमन्द हाथों सेगान फैलाना चाहिए मुझेअगर मैं आसमान हूँमगर मैंकब से ऐसा नहींकर रहा हूँजो हूँवही होने से डर रहा हूँ!
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Vastutah | Bhawani Prasad Mishra
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