EPISODE · Jul 28, 2023 · 2 MIN
वह सन्तुष्टि जो पाप को पराजित करती है।
from मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan · host मार्ग सत्य जीवन
यीशु ने उनसे कहा, “जीवन की रोटी मैं हूँ : जो मेरे पास आता है भूखा न होगा, और वह जो मुझ पर विश्वास करता है कभी प्यासा न होगा।” (यूहन्ना 6:35) हमें यहाँ जो देखना चाहिए वह यह है कि विश्वास का सार यह है - ख्रीष्ट में परमेश्वर हमारे लिए जो कुछ भी है उससे सन्तुष्ट होना। विश्वास को इस प्रकार से परिभाषित करना दो बातों पर बल देता है। पहली बात विश्वास परमेश्वर-केन्द्रित है। केवल परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ ही नहीं हैं जो हमें सन्तुष्ट करती हैं। पर यीशु में हमारे लिए वह सब कुछ जो परमेश्वर स्वयं है, हमें सन्तुष्ट करता है। विश्वास ख्रीष्ट में परमेश्वर को हमारे धन के रूप में ग्रहण करता है — केवल परमेश्वर के प्रतिज्ञा किए गए उपहारों को ही नहीं। विश्वास अपनी आशा को केवल आने वाले युग की अचल सम्पदा पर नहीं लगाता है, परन्तु इस तथ्य पर लगाता है कि परमेश्वर वहाँ होगा (प्रकाशितवाक्य 21:3)। “तब मैंने सिंहासन से एक ऊँची आवाज़ को यह कहते सुना, ‘देखो, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है, वह उनके मध्य निवास करेगा। वे उसके लोग होंगे तथा परमेश्वर स्वयं उनका परमेश्वर होगा।’” और अभी भी विश्वास जिस बात को सर्वाधिक गम्भीरता के साथ अपनाता है वह केवल यह वास्तविकता नहीं है कि पाप क्षमा किए जाएँगे (यद्यपि यह अति मूल्यवान है), परन्तु यह कि हमारे हृदयों में जीवित ख्रीष्ट की उपस्थिति है और स्वयं परमेश्वर की परिपूर्णता है। इफिसियों 3:17-19 में पौलुस प्रार्थना करता है कि “विश्वास के द्वारा ख्रीष्ट तुम्हारे हृदय में निवास करे . . . कि तुम परमेश्वर की समस्त परिपूर्णता तक भरपूर हो जाओ।” विश्वास को, यीशु में परमेश्वर हमारे लिए जो कुछ भी है उससे सन्तुष्ट होने के रूप में परिभाषित करने के द्वारा जिस दूसरी बात पर बल दिया गया है, वह है शब्द “सन्तुष्टि”। विश्वास परमेश्वर के झरने पर प्राण की प्यास का तृप्त किया जाना है। यूहन्ना 6:35 में हम देखते हैं कि “विश्वास करने” का अर्थ है यीशु के पास “आना” और “जीवन की रोटी” खाना और “जीवित जल” पीना (यूहन्ना 4:10, 14), जो कुछ और नहीं किन्तु स्वयं यीशु ही है। यही है पापपूर्ण आकर्षणों की दास बनाने वाली शक्ति को तोड़ने के लिए विश्वास की सामर्थ्य का रहस्य। यदि हृदय उसमें सन्तुष्ट है जो ख्रीष्ट में परमेश्वर हमारे लिए है, तो ख्रीष्ट के ज्ञान से हमें दूर करने वाली पाप की सामर्थ्य टूट गई है।
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वह सन्तुष्टि जो पाप को पराजित करती है।
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