EPISODE · Nov 27, 2025 · 2 MIN
Vidroh Karo Vidroh Karo | Shivmangal Singh Suman
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
विद्रोह करो, विद्रोह करो। शिवमंगल सिंह 'सुमन'आओ वीरोचित कर्म करोमानव हो कुछ तो शर्म करोयों कब तक सहते जाओगे, इस परवशता के जीवन सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।जिसने निज स्वार्थ सदा साधाजिसने सीमाओं में बाँधाआओ उससे, उसकी निर्मित जगती के अणु-अणु कण-कण सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।मनमानी सहना हमें नहींपशु बनकर रहना हमें नहींविधि के मत्थे पर भाग्य पटक, इस नियति नटी की उलझन सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।विप्लव गायन गाना होगासुख स्वर्ग यहाँ लाना होगाअपने ही पौरुष के बल पर, जर्जर जीवन के क्रंदन सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।क्या जीवन व्यर्थ गँवाना हैकायरता पशु का बाना हैइस निरुत्साह मुर्दा दिल से, अपने तन से, अपने तन से
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विद्रोह करो, विद्रोह करो। शिवमंगल सिंह 'सुमन'आओ वीरोचित कर्म करोमानव हो कुछ तो शर्म करोयों कब तक सहते जाओगे, इस परवशता के जीवन सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।जिसने निज स्वार्थ सदा साधाजिसने सीमाओं में बाँधाआओ उससे, उसकी निर्मित जगती के अणु-अणु कण-कण सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।मनमानी सहना हमें नहींपशु बनकर रहना हमें नहींविधि के मत्थे पर भाग्य पटक, इस नियति नटी की उलझन सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।विप्लव गायन गाना होगासुख स्वर्ग यहाँ लाना होगाअपने ही पौरुष के बल पर, जर्जर जीवन के क्रंदन सेविद्रोह करो, विद्रोह करो।क्या जीवन व्यर्थ गँवाना हैकायरता पशु का बाना हैइस निरुत्साह मुर्दा दिल से, अपने तन से, अपने तन से
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