EPISODE · Apr 9, 2026 · 2 MIN
Vimla Ki Yatra | Savita Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
विमला की यात्रा | सविता सिंहउसे जाना है आज शाम चार बजे रेलगाड़ी सेजाना है पति के घर से इस बार पिता के घरएक घर से दूसरे घर जाते हैं वहीनहीं होता जिनका अपना कोई घरबारह साल की उम्र मेंविमला ब्याह दी गईजब वह गई पति के घर पहली बारउस घर को उसने बनाया अपनालीप-पोत कर चमकाया उसेकूट-पीस कर हमेशा इकट्ठा किया और रखासाल-भर का अनाजधोए सबके पाँवसिले सबके उधड़े-फटे कपड़ेकहते हैं पति का घर होता है पत्नी का घरइस बार लेकिनविमला को जाना है दुख की ऐसी यात्रा परजिसके पार उतरजीवन स्वयं अपने पार उतरता हैदुख से मिल दुखकिसी उजाड़ में जा भटकता हैपति की मृत्यु के बाद औरत का जैसे संसार बदलता हैसुबह से ही ठीक कर रही है विमलाअपने कपड़ेसँभाल रही है क़सीदाकारी के लकड़ी वाले फ्रेमरेशम के आधे-अधूरेउलझे-सुलझे धागेवे कपड़े जिन पर काढ़ रखे हैं उसने वे सारे फूलजिन्हें प्रकृति भी नहीं खिलातीवे फूल जो अमर होते हैंऔर सिर्फ़ स्त्री के हृदय में खिलते हैंया फिर विमला के लिएचुपचाप उसके गुमसुम संसार मेंपति की मृत्यु के बादआज शाम चार बजेविमला जा रही है अपने पिता के संगकुछ दिनों के लिए बहलाने मनवह जा रही है रेलगाड़ी से एक ऐसी यात्रा परजिसमें कहीं नहीं आता उसका अपना घरमन ही मन इसलिए वह मनाती हैहे ईश्वर हों जीवन में मेरे ऐसी यात्राएँ अब कमहो मेरा एक ही जीवनएक अपना घरजैसे है मेरी एक आत्मा
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Vimla Ki Yatra | Savita Singh
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