EPISODE · Sep 2, 2025 · 2 MIN
Wahi Nahi Tha Premi | Anupam Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
वही नहीं था प्रेमी | अनुपम सिंहकिसी दिन तुम पूछोगे मेरे प्रेमियों के नाममैं अपना निजी कहकर टाल जाऊँगीलेकिन प्रेमी वही नहीं थाजिसने कोई वादा किया और निभाया भीजिसके साथ मैं पाई गईसिविल लाइंस के कॉफी हाउस मेंजिसके साथ बहुत सारी कहानियाँ बनींऔर शहर की दीवार पर गाली की तरह चस्पां की गईवह भी था जिसके आगोश मेंजाड़े की आग मुझे पहली बार प्रिय लगीजिसने कोई वादा नहीं कियाऔर स्वप्न टूटने से पहले ही चला गयामैं वह आग हर जाड़े में जलाती हूँवह भी जिसके सम्मुख मैंनेसबसे झीना वस्त्र पहनाफिर धीरे-धीरे उतार दियाजो मुझे नहीं किसी और को प्रेम करता थाऔर अपनी आँखें फेर लींमेरी स्थूल देह से आँख फेरने वाले पुरुष की याद मेंमैं अक्सर अपना वस्त्र उतार देती हूँप्रेमी वही नहीं थाजो देह के सभी संस्तरों से गुज़र फूल-सा खिलाऔर मैं भी आवें-सी दहकीवह भी था जिसे पाने की वेदना में मेरी बाँहैंवल्लरी-सी फैलती चली गईंजो अभी नहीं लौटा हैउसके औचक ही मिलने की आस है।
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वही नहीं था प्रेमी | अनुपम सिंहकिसी दिन तुम पूछोगे मेरे प्रेमियों के नाममैं अपना निजी कहकर टाल जाऊँगीलेकिन प्रेमी वही नहीं थाजिसने कोई वादा किया और निभाया भीजिसके साथ मैं पाई गईसिविल लाइंस के कॉफी हाउस मेंजिसके साथ बहुत सारी कहानियाँ बनींऔर शहर की दीवार पर गाली की तरह चस्पां की गईवह भी था जिसके आगोश मेंजाड़े की आग मुझे पहली बार प्रिय लगीजिसने कोई वादा नहीं कियाऔर स्वप्न टूटने से पहले ही चला गयामैं वह आग हर जाड़े में जलाती हूँवह भी जिसके सम्मुख मैंनेसबसे झीना वस्त्र पहनाफिर धीरे-धीरे उतार दियाजो मुझे नहीं किसी और को प्रेम करता थाऔर अपनी आँखें फेर लींमेरी स्थूल देह से आँख फेरने वाले पुरुष की याद मेंमैं अक्सर अपना वस्त्र उतार देती हूँप्रेमी वही नहीं थाजो देह के सभी संस्तरों से गुज़र फूल-सा खिलाऔर मैं भी आवें-सी दहकीवह भी था जिसे पाने की वेदना में मेरी बाँहैंवल्लरी-सी फैलती चली गईंजो अभी नहीं लौटा हैउसके औचक ही मिलने की आस है।
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Wahi Nahi Tha Premi | Anupam Singh
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