EPISODE · Mar 17, 2024 · 2 MIN
Ziladheesh | Alok Dhanwa
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ज़िलाधीश | आलोक धन्वा तुम एक पिछड़े हुए वक्ता हो। तुम एक ऐसे विरोध की भाषा में बोलते हो जैसे राजाओं का विरोध कर रहे हो! एक ऐसे समय की भाषा जब संसद का जन्म नहीं हुआ था! तुम क्या सोचते हो संसद ने विरोध की भाषा और सामग्री को वैसा ही रहने दिया जैसी वह राजाओं के ज़माने में थी?यह जो आदमीमेज़ की दूसरी ओर सुन रह है तुम्हेंकितने करीब और ध्यान सेयह राजा नहीं जिलाधीश है!यह जिलाधीश हैजो राजाओं से आम तौर परबहुत ज़्यादा शिक्षित हैराजाओं से ज़्यादा तत्पर और संलग्न !यह दूर किसी किले में - ऐश्वर्य की निर्जनता में नहींहमारी गलियों में पैदा हुआ एक लड़का हैयह हमारी असफलताओं और गलतियों के बीच पला हैयह जानता है हमारे साहस और लालच कोराजाओं से बहुत ज़्यादा धैर्य और चिन्ता है इसके पासयह ज़्यादा भ्रम पैदा कर सकता हैयह ज़्यादा अच्छी तरह हमे आज़ादी से दूर रख सकता हैकड़ीकड़ी निगरानी चाहिएसरकार के इस बेहतरीन दिमाग पर !कभी-कभी तो इससे सीखना भी पड़ सकता है !
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Ziladheesh | Alok Dhanwa
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