EPISODE · Jun 24, 2026 · 2 MIN
Zindagi Jab Bhi Teri Bazm Mein | Shahryar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें । शहरयारज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमेंये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमेंसुर्ख़ फूलों से महक उठती हैं दिल की राहेंदिन ढले यूँ तिरी आवाज़ बुलाती है हमेंयाद तेरी कभी दस्तक कभी सरगोशी सेरात के पिछले-पहर रोज़ जगाती है हमेंहर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ हैअब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें
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ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें । शहरयारज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमेंये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमेंसुर्ख़ फूलों से महक उठती हैं दिल की राहेंदिन ढले यूँ तिरी आवाज़ बुलाती है हमेंयाद तेरी कभी दस्तक कभी सरगोशी सेरात के पिछले-पहर रोज़ जगाती है हमेंहर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ हैअब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें
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