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स्वाध्याय — 165 episodes

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Title
1

महाराज पृथु का आविर्भाव और राज्याभिषेक, वन्दीजन द्वारा महाराज पृथु की स्तुति।

2

राजा वेन की कथा।

3

ध्रुववंश का वर्णन, राजा अंग का चरित्र।

4

ध्रुव जी को कुबेर का वरदान और विष्णुलोक की प्राप्ति।

5

स्वायम्भुव मनु का ध्रुव जी को युद्ध बंद करने के लिये समझाना।

6

उत्तम का मारा जाना, ध्रुव का यक्षों के साथ युद्ध।

7

ध्रुव कृत भगवान की स्तुति, ध्रुव का वर पाकर घर लौटना, हिन्दी भावार्थ।

8

ध्रुव का वर पाकर घर लौटना ( श्लोक पाठ)

9

ध्रुव का वन गमन- हिन्दी भावार्थ।

10

ध्रुव का वनगमन। (श्लोक पाठ)

11

हिन्दी भावार्थ- दक्षयज्ञ की पूर्ति।

12

दक्षयज्ञ की पुर्ति।

13

ब्रह्मादि देवताओ का कैलाश जाकर श्रीमहादेवजी को मनाना।

14

वीरभद्र कृत दक्षयज्ञ विध्वंस और दक्षवध।

15

सती का अग्निप्रवेश।

16

सती का पिता के यहाॅ यज्ञोत्सव में जाने के लिये आग्रह करना।

17

भगवान् शिव और दक्ष प्रजापति का मनोमालिन्य।

18

स्वायम्भुव मनु की कन्याओं के वंश का वर्णन।

19

देवहूति को तत्वज्ञान एवं मोक्षपद की प्राप्ति। माता देवहूति कृत कपिल भगवान् की स्तुति।

20

धूममार्ग और अर्चिरादि मार्ग से जानेवालों की गति का और भक्तियोग की उत्कृष्टता का वर्णन।

21

मनुष्य योनि को प्राप्त हुए जीव की गति का वर्णन। ( गर्भस्थ जीव की भगवान् से प्रार्थना- स्तुति)

22

देह गेह में आसक्त पुरूषों की अधोगति का वर्णन।

23

भक्ति का मर्म और काल की महिमा।

24

अष्टांगयोग की विधि।

25

प्रकृति पुरूष के विवेक से मोक्ष प्राप्ति का वर्णन।

26

महदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वों की उत्पत्ति का वर्णन।

27

देवहूति के प्रश्न तथा भगवान् कपिल द्वारा भक्तियोग की महिमा का वर्णन।

28

श्री कपिलदेव जी का जन्म।

29

कर्दम और देवहूति का विहार।

30

देवहूति के साथ कर्दम प्रजापति का विवाह।

31

कर्दम जी की तपस्या और भगवान् का वरदान।

32

ब्रह्मा जी की रची हुई अनेक प्रकार की सृष्टि का वर्णन।

33

हिरण्याक्ष वध।

34

हिरण्याक्ष के साथ वराहभगवान का युद्ध।

35

हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष का जन्म तथा हिरण्याक्ष की दिग्विजय।

36

जय विजय का वैकुण्ठ से पतन।

37

जय विजय को सनकादि का शाप।

38

दिति का गर्भ धारण।

39

वाराह अवतार की कथा, भगवान् वाराह की स्तुति।

40

सृष्टि का विस्तार।

41

मन्वन्तरादि काल विभाग का वर्णन।

42

दस प्रकार की सृष्टि का वर्णन।

43

ब्रह्मा जी द्वारा भगवान् की स्तुति।

44

ब्रह्मा जी की उत्पत्ति।

45

विदुर जी के प्रश्न।

46

विराट् शरीर की उत्पत्ति।

47

विदुर जी का प्रश्न और मैत्रेय जी का सृष्टि क्रम वर्णन।

48

उद्धव जी से विदा होकर विदुर जी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना।

49

भगवान् के अन्य लीलाचरित्रों का वर्णन।

50

उद्धव जी द्वारा भगवान् की बाललीलाओं का वर्णन।

51

उद्धव और विदुर की भेंट।

52

भागवत के दस लक्षण।

53

ब्रह्माजी का भगवद्धाम दर्शन और भगवान् के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवत का उपदेश।

54

राजा परीक्षित के विविध प्रश्न।

55

भगवान् के लीलावतारों की कथा, हिन्दी भावार्थ।

56

भगवान् के लीलावतारों की कथा।

57

विराट्स्वरूप की विभूतियों का वर्णन।

58

सृष्टि वर्णन।

59

कामनाओं के अनुसार विभिन्न देवताओ की उपासना, तथा भगवद्भक्ति के प्राधान्य का निरूपण।

60

भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूपों की धारणा,तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्ति का वर्णन।

61

ध्यान विधि और भगवान् के विराट् स्वरूप का वर्णन।

62

परीक्षित का अनशन व्रत और शुकदेव जी का आगमन।

63

राजा परीक्षित को श्रंगी ऋषि का शाप।

64

महाराज परीक्षित द्वारा कलियुग का दमन।

65

धर्म और पृथ्वी का संवाद।

66

कृष्ण विरहव्यथित पाण्डवों का परीक्षित को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना।

67

अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना।

68

विदुर जी के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना।

69

परीक्षित का जन्म।

70

द्वारका में श्रीकृष्ण का राजोचित स्वागत।

71

श्रीकृष्ण का द्वारका - गमन ।

72

युधिष्ठिरादि का भीष्म जी के पास जाना और भीष्म स्तुति।

73

गर्भ में परीक्षित् की रक्षा, कुन्ती के द्वारा भगवान् की स्तुति, युधिष्ठिर का शोक।

74

अश्वत्थामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन के द्वारा अश्वत्थामा का मान मर्दन।

75

भगवान् के यश-कीर्तन की महिमा और देवर्षि नारद जी का पूर्व चरित्र।

76

व्यास जी का असन्तोष।

77

भगवान् के अवतारों का वर्णन।

78

मङ्गलाचरण, कथा प्रारम्भ, भगवत्कथा और भगवद्भक्ति का माहात्म्य।

79

सप्ताह यज्ञ की विधि।

80

धुन्धुकारी को प्रेतयोनि की प्राप्ति और उससे उद्धार।

81

गोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ।

82

भक्ति के कष्ट की निवृत्ति।

83

भक्ति का दुःख दूर करने के लिये नारद जी का उद्योग।

84

देवर्षि नारद की भक्ति से भेंट।

85

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २९१~२९२

86

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २८७|२८८|२८९|२९०

87

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २८३|२८४|२८५|२८६

88

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २८१|२८२

89

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २७८|२७९|२८०

90

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २७६|२७७

91

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २७४|२७५

92

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २७३|२७४

93

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २७२|२७३

94

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २७०|२७१

95

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६९

96

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६७|२६८

97

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६५|२६६

98

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६४|२६५

99

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६२|२६३

100

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६१

101

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २६०

102

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५९

103

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५८

104

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५७

105

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५५|२५६

106

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५४

107

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५२|२५३

108

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५१

109

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २५०

110

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४९

111

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४८

112

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४७

113

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४६ हिन्दी भावार्थ।

114

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४६

115

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४५, हिन्दी भावार्थ।

116

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४५

117

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४४

118

श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय २४२|२४३

119

श्रीमत्स्य महापुराण,,अध्याय २४०|२४१

120

शिवमहिम्नः स्तोत्र एवं शिव आरती।

121

श्रीलक्ष्मीनृसिंहसहस्रनाम स्तोत्र।

122

शिवानन्दलहरी, चतुर्थ भाग एवं श्रीकृष्णाष्टकम्।

123

शिवानन्दलहरी भाग तृत्तीय, (२१ से ५४ का भावार्थ)

124

श्रीशिवमहापुराण, वायवीय संहिता, उत्तरखण्ड, अध्याय ३१

125

श्रीशिवमहापुराण, कोटिरूद्र संहिता

126

मार्कण्डेय पुराण

127

मार्कण्डेय पुराण

128

मार्कण्डेय पुराण

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मार्कण्डेय पुराण

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मार्कण्डेय पुराण