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एक प्रश्न
बे मुहब्बत ज़िन्दगानी का मज़ा कुछ भी नहीं
एकांत के पलों में मेरा नाम लिख लेना
ओ री विदेशिनी
पिता के फूल
एक शाम
बूंद ओस की
इंद्रधनुष
ओ मेरे घर
कुछ सीधे सादे प्रश्न
नेरूदा
मेमायर्स पढ़ने के बाद
दोष नहीं, भूल नहीं
अस्वीकृत प्रेम
यह विवशता
प्यार का मौसोलियम
धूप
बगुलों के पंख
प्रियतमा
असहमत ऋतुओं पर नजरदारी
हबल
मुझे क्या क्या न मेरा गांव लगे
मेरा प्राण जिसे चाहता है तुम वही, तुम वही हो
मित्रता का बंधन ही हो पुण्य मंत्र
बारिश की याद
आईना
नग्नगीत
मैंने तुम्हारे साथ बांधा है अपना प्राण
जो मेरे सपनों की साथी रही रवीन्द्रनाथ ठाकुर
गाता हूं गीत बिन कारण ही
मैं तुमसे प्यार करता हूं
मेरा दीया
चांदनी रात में रेलयात्रा
अपनी अपनी राह
इन दिनों चाय बागान
नामों के बारे में कविता
अकेली
दर्शन
चांद की हंसी का बांध टूट चुका है
तुम संध्या की मेघमाला हो
गीली मुलायम लटें
तुमने मुझे
वह सलोना जिस्म
दुश्मन आसमां अपना
मेहरबां तो है
हो रहेगा कुछ न कुछ,घबरायें क्या
मधुशाला ८६
तिरे कमाल की हद कब कोई बशर समझा
समझ लिये कि यही रंग है ज़माने का
कहां तक किसी पर सितम ढाइयेगा
प्रतीति
अपनी सोई हुई दुनिया को जगा लूं तो चलूं
साम्य
स्वस्तिक क्षण
कौन यहां आया था कौन दीया बाल गया
तसलसुल
पत्थर
ताजमहल
उबाल
हम और हमारा ग़म
तुझे कैसे भूल जाऊं
निकले कुछ एक बार घर से हम
ये वसंत है भाई
प्रतीक्षित
पांव की नाव
उदास आकाश
मौसमों के रंग सारे दिल के अंदर रह गये
यह बात नहीं है कि मुझे चाह नहीं है
पहले दिल आबाद था
हम तो समझे थे कि कुछ अक्ल ठिकाने आई
दीवार -ओ-दर को देखते हैं
बनाकर फ़क़ीरों का हम भेस
उस सीमतन के पांव
देख कर चंद ख़्वाबे गिरां चल दिये
उम्र भर उम्मीदवारों में रहा
अहबाब परीशां हैं मिरे तर्ज़े अमल से
अपना सलीब आप उठा लूं
अपना समझ के मैंने तुम्हें दिल दिखा दिया
बोलते रहो
यह समझना हो तो झंझावात में आओ
यहां पत्थर बरसते हैं
ये तो अजब विपदा सी है
ये गिरता हुआ शहर मेरा नहीं
तआ'रुफ़
तुझे गीत में जो बुला गये
मैं गौतम नहीं
हम किसी से क्या कहें
बनारस
ख़्वाब का दर बंद है
एक ख़्वाहिश
टुकड़ों में बंटी हुई ज़िन्दगी
मैं तुम्हें याद कर रहा था
आदमी की तलाश
बंजारा-नामा
Only for thee that I hope (Gitanjali)
दोनों इक सड़क के आर- पार चल रहे हैं हम
ख़्याल को वजूद देके, उसको ढूंढ़ते रहे
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर 2
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर 1
मोहब्बत अब नहीं होगी