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Title
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Shri Ram-Valmikiji Samwad-9th Bhakt Vyakhya- Aviral Pravah by Sant Maithilsharanji Maharaj (Kinker-Nandan)

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Maharajshree Ke Janam Din Ki Badhai Chitrakoot Se - Bhaishree

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 76, प्रवर्तियों के आधारभूत ही जीव के कल्याण के उपाय संभव है

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 75, समर्पण की पूर्णता

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Manifestation of Ram Charit Manas - Sunderkand-Doha # 1

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Manifestation of Ram Charit Manas - Ayodhyakand-Doha 321

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 74, भगवान सदैव भक्त के रक्षक है !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 73, अंगद की संवेदनशीलता एवं भगवत कृपा

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 72, भगवान की कृपा करने की अनूठी रीति

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 71, भक्ति में भाव की शक्ति

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 70, गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज एवं भगवान शंकर जी को भगवान श्री राम के लीला दर्शन

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 69, श्री राम चरित मानस एवं श्री वाल्मीकि रामायण जी की तुलना

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 68, ज्ञान एवं भक्ति अभेद है !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 67, भेद एवं अभेद भक्ति

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 65 & 66, विषाय: "मैं और मम से रहित संपर्पण पूर्ण होता है" एवं "आत्म नियंत्रण पुरुष को गौरव प्रदान करता है"!

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 64, मंथरा- भेद बुद्धि का एक प्रतीक

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 63, अहं पर आधारित सद्गुण अस्थिर होते है !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 62, एक विस्तृत स्वरूप मानसिक रोगों का

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 61, सम्मान प्रेरणादायक हो, तो प्रशंसा में कृपणता अनुचित नही !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 60, सात्विक अभिमान भी नष्ट हो !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 59, साधु स्वभाव की महिमा

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 58, भगवत कृपा के विभिन्न पात्र

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 57, मन की गति का सदुपयोग एवं जय व पराजय का अनुभव

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 56, भक्ति रूपी विश्वास में ही विश्राम संभव है !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 55, ज्ञान से नही अपितु भाव एवं भावना से मनुष्य में परिवर्तन होता है !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 54, एक महान कलाकार एवं भक्त में समानता

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 53, विषय: व्यक्ति भेदवादी हो या अभेदवादी हो ?

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 52, विषय: लोभ और काम का त्याग भेद से ही होगा

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 51, विषय: ज्ञान का परिणाम अभिमानहीन होना है एवं सच्चे ज्ञान का स्वरूप

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 50, विषय: भक्त सुतीक्ष्ण जी का विवेकमय अभिमान

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 49, विषय: भगवान की कथा क्यों सुनी जाती है?

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 47, विषय: मानस रोग की भूमिका - नारद जी का मोह

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 48, विषय: हमारा मोह कैसे दूर हो

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 45 & 46, हमारा अभिमान कैसे दूर हो एवं भगवान श्री राम का शील

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 43 & 44, विषय: रामायण जी के महानतम वैद्य एवं श्री हनुमान जी महाराज का रावण को सुझाव

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 42, विषय: दुर्गुणों की व्याख्या

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 41, विषय: सिद्धांत और व्यवहार

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 39 & 40, विषय : अहंकार से कथा का लाभ दूर हो जाता है एवं सोने जैसी श्रद्धा

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गुण, श्री राम से ही जुड़ कर धन्य हो सकते है ! Acquired virtues have no value if not attached to Shri Ram!

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प्रेममयी कृपामूर्ति भगवान श्री राम! Premmayi-Kripamurti Bhagwan Shri Ram

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 38, विषय: मोह सकल व्याधीन कर मूला

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 34 & 35, विषय : भगवती अहिल्या जी का उद्धार एवं दंभ और शील का समन्वय अत्यावश्यक

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 36 & 37, विषय : भक्ति में भगवान का साथ हो एवं सर्वकालीन पथिक श्री राम जी का स्वरूप

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 32 & 33, विषय : नारद जी का पार्वती जी के प्रति उपदेश एवं प्रभु के अतिशय प्रिय प्रेमानुगामी भक्त सूतीक्क्षण !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 30 & 31, विषय : संतत्व की परिभाषा एवं जड़ को नहीं, चैतन्य को ढूँढिए !

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 28 & 29, विषय : राम रूपी नवधा भक्ति एवं ज्ञान एवं कर्म और भक्ति से सम्पूर्ण हनुमत चरित

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 26 & 27, विषय : वन गमन की लीला और दिव्य सीख एवं भगवान का तापस रूप मे प्रेम से साक्षात्कार

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 24 & 25, भगवती सीता माँ का दिव्य चिंतन एवं व्यक्ति का मोह रूपी वन

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 22 & 23, विषय: यह चरित जे गावही हरि पद पावही एवं व्यक्ति की बुद्धि व भगवान के भाव

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 20 & 21, विषय:परीक्षा की महिमा एवं स्वार्थ और परमार्थ का संतुलन

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 18 & 19, विषय: संतत्व एवं स्थिरप्रज्ञता में सामंजस्य की आवश्यकता तथा दंभ और शील का समन्वय आवश्यक

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 16 & 17, वनगमन लीला और भगवत चरण की महिमा तथा भगवान श्री राम की नीति एवं प्रीति का समन्वय

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मानस - पंचामृत कथा - 8/9

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मानस - पंचामृत कथा - 7 /9

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मानस - पंचामृत कथा - 6/9

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मानस - पंचामृत कथा - 5/9

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मानस - पंचामृत कथा - 4/9

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 14 & 15 , भक्ति मार्ग में भगवान का साथ हो एवं सर्व कालिक पथिक श्री राम जी का स्वरूप

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मानस - पंचामृत कथा - 3/9

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मानस - पंचामृत कथा - 2/9

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मानस - पंचामृत कथा - 1/9

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 12 & 13, मानस में विंदयाचल पर्वत का आध्यात्मिक तात्पर्य एवं भक्ति मार्ग में आत्म निरक्षण की आवश्यकता

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 10 & 11, महाभारत के यक्ष प्रशन एवं मानव जीवन के रहस्य की समानता एवं सत्कर्म और उनका प्रदर्शन

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 8 & 9 , विषय - मानिए सभी राम के नाते एवं साधन पद्धति का अवलोकन अत्यावश्यक

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किंकर वचनामृत श्रंखला - 6 & 7, विषय - ग्राह्य बुद्धि कैसी हो एवं श्री राम के अगणित रूप

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Kinker Vachnamrit Series By Dr.Jaya Singh - 5, किंकर वचनामृत - गंगा रूपी कविता का जन्म

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Kinker Vachnamrit Series By Dr.Jaya Singh - 4, किंकर वचनामृत - श्रद्धा रूपी साधना का क्रम

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Kinker Vachnamrit Series By Dr.Jaya Singh - 3, किंकर वचनामृत - भाव नगर और शरीर नगर की समानता का महत्व

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Kinker Vachnamrit Series By Dr.Jaya Singh - 2, किंकर वचनामृत - शुद्ध चित्त की महिमा

71

Kinker Vachnamrit Series By Dr.Jaya Singh - 1, किंकर वचनामृत - भाषा की गरिमा

72

Ram Charit Manas Manthan, राम चरित मानस मंथन - 1 , An Introduction of Pujya Sant Maithilisharanji

73

Yug Purush Maharaj Shri Ramkinker ji Upadhyaya - 1, An Introduction, युग पुरुष महाराज श्री रामकिंकर जी उपाध्याय - एक परिचय