PODCAST · society
Ashutosh Kumar's podcast
by Ashutosh Kumar
मैं आइना हु दिन पलट के रात करता हु फिर होके तन्हा आईने से बात करता हु मैं वो नहीं जो इस सफर में हर सफर की दुस्वारिया पालु मैं इस सफर में बस इस सफर के मंजिलों की बात करता हु मैं वो नहीं जो विरानियो में खुद की ख्वाइशे पालु मैं भीड़ में भी,भीड़ से ही खुद के शिखर की बात करता हु मैं वो नहीं जो हार के बेकार हो गुमनाम मर जाऊ मैं मौत से ही अंतिम घरी में जीवन डगर की बात करता हु
Episodes
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Episode 8 - Ashutosh Kumar's podcast
Ishq shayari
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Episode 7 - Ashutosh Kumar's podcast
Ishq shayari
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Episode 4 - Ashutosh Kumar's podcast
अपनो से मुकरकर हर बात लिखे
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हम सरफिरे है,फिर क्यों घिरे है
सरफिरा शायर
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मौत से भी बात करता हु
मैं आइना हु दिन पलट के रात करता हु फिर होके तन्हा आईने से बात करता हु मैं वो नहीं जो इस सफर में हर सफर की दुस्वारिया पालु मैं इस सफर में बस इस सफर के मंजिलों की बात करता हु मैं वो नहीं जो विरानियो में खुद की ख्वाइशे पालु मैं भीड़ में भी,भीड़ से ही खुद के शिखर की बात करता हु मैं वो नहीं जो हार के...
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मैं आइना हु दिन पलट के रात करता हु फिर होके तन्हा आईने से बात करता हु मैं वो नहीं जो इस सफर में हर सफर की दुस्वारिया पालु मैं इस सफर में बस इस सफर के मंजिलों की बात करता हु मैं वो नहीं जो विरानियो में खुद की ख्वाइशे पालु मैं भीड़ में भी,भीड़ से ही खुद के शिखर की बात करता हु मैं वो नहीं जो हार के बेकार हो गुमनाम मर जाऊ मैं मौत से ही अंतिम घरी में जीवन डगर की बात करता हु
HOSTED BY
Ashutosh Kumar
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