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HANS VAANI
by IVM Podcasts
Hans, India's most widely read literary magazine started by Munshi Premchand, is now available in the audio version and features a list of curated stories in Hindi, poems in Hindi, editorials etc.Hans Vaani is a Hindi Stories Podcast also bringing Gazals and Hindi Poetry in collaboration with Jashn-e-Qalam, a theatre company, specializing in solo narrations and dramatizations of stories. And IVM Podcasts, which are providing the stage for the expansion of Hindi Literature.Hansvaani is simply the best of Hindi literature and your one place stop for stories from acclaimed writers and poets with literary works from the finest artists in the world.
Episodes
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कविता: लापता कश्ती (Kavita: Lapata Kashti)
लेखक: सतीश लोथे | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें…
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कहानी: स्थगित समय गुफा के वे फलाने आदमी: भाग-2 (Staghit Gufa ke Ve Falane Aadmi - Part 2)
लेखक: पंकज सुबीर | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें...
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कविता: समय की सिल (Kavita: Samaya Ki Sil)
लेखक: पद्मजा शर्मा | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे...
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कहानी: स्थगित समय गुफा के वे फलाने आदमी: भाग-1 (Staghit Gufa ke Ve Falane Aadmi - Part 1)
लेखक: पंकज सुबीर | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें...
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कविता: आशा (Kavita: Aasha)
लेखक: आलोक कुमार मिश्रा | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच...
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कहानी: उस गोलार्ध से (Kahani: Us Golardh se)
लेखक: सुश्री कविता | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे...
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कहानी: सब चुप रहे (Kahani: Sab Chup Rahe)
लेखक: संजय जैन | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें हैं...
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कहानी: वर (Kahani: Var)
लेखक: रत्नकुमार सांभरिया | आवाज़: शाश्विता शर्मा अभिजात्य वर्ग में पति के दुराचारों के बावजूद पुरुष प्रधान समाज की जकड़बंदियां आड़े आ जाती हैं। ‘वर‘ कहानी की नायिका रोशनीबाई जो कुचबन्दा नामक घुमन्तू जनजाति से संबंध रखती है, क्या भरी पंचायत में अपने शराबी और व्याभिचारी पति बोलाराम को छोड़ने का निर्णय…
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कहानी: नायक, खलनायक, विदूषक (Kahani: Nayak, Khalnayak, Vidushaq)
लेखक: मन्नू भंडारी | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे…
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कहानी: मुक्ति (Kahani: Mukti)
लेखक: मन्नू भंडारी | आवाज़: शाश्विता शर्मा भरतीय समाज की विडम्बना देखिये- महिलाओं से जितनी अपेक्षा की जाती है, उनकी उतनी ही उपेक्षा होती है। मुक्ति कहानी में मन्नू भंडारी ने एक वास्तविक स्थिति को लेकर इस सामाजिक सच को बेहद ही सशक्त रुप से उजागर किया है। प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका…
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कविता: दो मिनट का मौन (Kavita: Do Minute ka Maun)
लेखक: दिव्या श्री | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे…
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कविता: गोपाल को किसने मारा (Kavita: Gopal Ko Kisne Mara)
लेखक: मन्नू भंडारी | आवाज़: राजेश कुमार “गोपाल को किसने मारा” मानवीयता के मर जाने और संवेदनशीलता के पथरा जाने की कथा है। दो बेटों का पिता रामनिझावन बुढापे में अकेला पड़ जाता है क्योंकि बड़ा बेका गोविंदा बिजली का करंट लगने से मर जाता है और छोटा गोपाल पसरते बाजार की बाजारू आधुनिकता के फेर में पड़कर...
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कविता: गिरे हुए (Kavita: Gire Hue)
लेखक: सुधा अरोड़ा | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे…
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कहानी: शहीद (Kahani: Shaheed)
लेखक: टेकचंद | आवाज़: अजीत सिंह पालावत राष्ट्र ऐसी वृहद अस्मिता है जिसमें जाति धर्म संस्कृति भाषा सब समाहित होकर भारतीय हो जाते हैं । परंतु क्या आज भी जाति ऐसी अवधारणा है जो देश से जुड़ कर भी अक्षुण रहती है , अकाट्य रहती है ? क्या जाति के आधार पर भी देश पर हुए शहीद के प्रति भावनात्मक रवैये में…
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कहानी: नई ईदगाह - भाग २ (Kahani: Nayi Idgah - Part 2)
लेखक: अनुराग अन्वेषी | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे...
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कविता: मैं लिखूंगा (Kavita: Mai Likhunga)
लेखक: विवेक सत्यांशु | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे…
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कहानी: नई ईदगाह (Kahani: Nayi Idgah)
लेखक: अनुराग अन्वेषी | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे...
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ग़ज़ल: अदीब हैं (Gazal: Adeeb Hain)
लेखक: आनंद पांडेय तन्हा | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे...
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कहानी: बच्चे और बावर्ची (Kahani: Bachche Aur Bawarchi)
लेखक: जितेन ठाकुर | आवाज़: राजेश कुमार कहानी में एक बावचीॅ ,फुटपाथ के उपेक्षित और तिरस्कृत बच्चों को जीने कि कला सिखाता है और उन्हें बताता है कि जीने के लिए रोटी जरूरी है और रोटी खाने के लिए स्वाद ।पर स्वाद जगाने वाला रस हमारे ही अपने भीतर छुपा रहता है न कि बाहरी चीजों से हमारे अंदर आता है ।बच्चे…
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लघुकथा: मधु मक्खी (Short Story: Madhu Makkhi)
लेखक: ज़ाफर मेहंदी ज़ाफरी | आवाज़: जेमिनी पाठक प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह...
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कहानी: एंटीबॉडी (Kahani: Antibodies)
लेखक: गोविंद मिश्र | आवाज़: जेमिनी पाठक कोरोना काल के सन्दर्भ का उपयोग करते हुए , यह कहानी हमारी मानसिकता को उजागर करती है| कैसे हम अपनी वास्तविक स्थितितयों को बेहतर बनाने की बजाये , हर त्रासदी के लिए ईश्वर की मर्ज़ी को जिम्मेवार ठहरा देते है| एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य के लिए ,हमें अपने शरीर से…
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गज़ल: दूसरों के ऐब (Gazal: Dusro ke Aib)
लेखक: जितेंद्र धीर | आवाज़: जेमिनी पाठक प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें...
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कहानी: शंबूक, प्लेटफार्म और पिल्ला (Kahani: Shambook, Platform Aur Pilla)
लेखक: महावीर राजी | आवाज़: ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी प्लेटफॉर्म पर मंडराता, भूख से आकुल ब्याकुल भिखारी का छोटा बच्चा क्षुधा शमन के लिए कैसी कैसी बाल सुलभ हरकते करता है और उसकी हरकतों में बेबसी, तिलमिलाहट और आक्रोश के कैसे कैसे शेड्स विन्यस्त रहते हैं , कहानी इसी कथ्य पर आधारित है। पौराणिक शम्बूक का वध...
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ग़ज़ल: वजूद (Gazal: Wajood)
लेखक: संजय सिंह मस्त | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे…
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कहानी: पांचवे पुरुष की तलाश में (Kahani: Paanchwe Purush Ki Talaash Mein)
लेखक: निधि अग्रवाल | आवाज़: शाश्विता शर्मा चाहनाओं की धूप- छांव में अपनी रंगत बचाने की ज़िद लिए, खिलते-मुरझाते सूरजमुखी के आत्मनिर्भर होने की हिंदी कहानी । प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही…
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ग़ज़ल: बात जो कल तक दबी थी (Gazal: Baat Jo Kal Takk Dabi Thi)
लेखक: जितेंद्र धीर | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें...
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कहानी: ज़हन में अटका हुआ सा कुछ(Kahani: Zehan Mein Atka Hua Sa Kuch)
लेखक: सुशांत सुप्रिय | आवाज़: राजेश कुमार यह कहानी धर्मांध कट्टरपंथियों द्वारा धर्म और जाति के नाम पर खून-ख़राबा करने वालों को बेनक़ाब करती है । प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस…
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ग़ज़ल: दर-ओ-दीवार (Gazal: Dar-O-Diwar)
लेखक: मनीष बादल | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम'...
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कहानी: कोई परिचित (Kahani: Koi Parichit)
लेखक: स्वाति तिवारी | आवाज़: राजेश कुमार भारत सदैव वैश्विक परिवार अर्थात् "वसुधैव कुटुम्बकम" के सिद्धांत पर विश्वास करता आया है.भारतीय समाज के लोकाचार का पालन करते हुए कोविड-19 के लिए आपातकालीन स्थिति में जब सगे साथ छोड़ रहे थे तब कुछ अपरिचितों ने आपसी सह-अस्तित्व और रिश्तों की मिसाल कायम की।…
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ग़ज़ल: हुआ कैसे ये हाल (Gazal: Hua Kaise Ye Haal)
लेखक: प्रेमकुमार गौतम | आवाज़: ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच…
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बुरा उदाहरण (Kahani: Bura Udaharan)
लेखक: दीपक शर्मा | आवाज़: के. सी. शंकर 'जेल से बचने के लिए अस्पताल में दाखिल हुआ मेरीकहानी 'बुरा उदाहरण 'वास्तविक कारण का केन्द्रीय पात्र अपने साथ हुई दुर्घटनाओं के लिए अपनी पत्नी के द्वारा हुए अपने अनादर को उत्तरदायी ठहराता है। पर क्या है उसकी स्तिथि का वास्तविक कारण ? जानने के लिए सुनिए कहानी '...
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कविता: संवाद (Kavita: Samvaad)
लेखक: निवेदिता झा | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह…
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कहानी: अलाउद्दीन पद्मावती (Kahani: Allauddin Padmavati)
लेखक: बिमल लामा | अनुवादः अमृता बेरा | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के...
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नफरतों को काटती (Gazal: Nafraton Ko Katati)
लेखक: मनीष बादल | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम'...
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कहानी: लफंटूस (Kahani: Lafantoos)
लेखक: प्रमोद द्विवेदी | आवाज़: जेमिनी पाठक प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह...
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लघुकथा: सोच (Short Story: Soch)
लेखक: मार्टिन जॉन | आवाज़: केसी शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम'…
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कहानी: तसव्वुर-ए-जानाँ (Kahani: Tassavur E Jaana)
लेखक: अवघेश प्रीत | आवाज़: केसी शंकर, शशविता शर्मा, ज्ञानेंद्र त्रिपाठी और अन्य कलाकार एक स्त्री के जीवन में शादी से पहले आया प्रेम और शादी के बाद उस प्रेम का दोबारा उसके जीवन में क्या अनैतिक है ? क्या स्त्री के लिए अपने पूर्व प्रेम को भुलाना आवश्यक हो जाता है , जिस से वह अपराधबोध से शर्मिंदा न हो…
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गज़ल: आज हर एक अफसाने (Gazal: Aaj Har Ek Afsane)
लेखक: अमर कांत कुमार | आवाज़: के. सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह...
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कहानी: भीम टोला की छोकरी (Kahani: Bheem Tola ki Chokri)
लेखक: सुधा अरोड़ा | आवाज़: शाश्विता शर्मा एक है मध्यवर्ग की संतुष्ट औरत सोनम चौधरी जो अपने घर की चहारदीवारी को ही अपना सब मानती है और अपने घर की दीवारों से बाहर झाँकने को तैयार नहीं !दूसरी है सुकमा जो सारी आपदाओं विपदाओं से घिर कर भी सिर्फ अपनी किस्मत को दोष देती है और हर हाल में मुस्कुराना नहीं...
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लघुकथा: सपने सच नहीं होते (Laghu Katha: Sapne Sach Nahi Hote)
लेखक: अशफाक अहमद | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम'...
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कहानी: उस भीड़ में वो कौन था? (Kahani: Uss Bheed Mein Woh Kaun Tha?)
लेखक: श्याम जांगिड़ | आवाज़: राजेश कुमार मार्च 2020 में देश में लगे संपूर्ण लोकडाउन के कारण यूपी-बिहार के लाखों मजदूर महानगरों से निकल कर पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े थे । भीषण गरमी में वे तपती सड़कों पर चल रहे थे । उस महा त्रासदी पर लिखी यह मानवीय संवेदना की झकझोरने वाली कथा है । प्रेमचंद...
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ग़ज़ल: लिखना पढ़ना (Gazal: Likhna Padhna)
लेखक: अशरफ अली | आवाज़: राजेश कुमार प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसकी कविता, ग़ज़ल और कहानियों को अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम'…
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कहानी: भूख का कलाकार (Kahaani: Bhookh Ka Kalaakar)
लेखक: फ्रेंज काफ्का | अनुवादः आनंद मोहन उपाध्याय | आवाज़: के.सी. शंकर समय के साथ और बाज़ार के नित नये और सहज आकर्षण में मूल्यपरक व्यवहार अप्रासंगिक,उपेक्षित और तिरस्कृत हो जाते हैं।कला और उसके प्रति ईमानदार कलाकार के लिये तो यह संघर्ष अत्यंत कठिन और जटिल होता है।काफ्का की यह कहानी (The Hunger…
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कविता: आंदोलन (Kavita: Aandolan)
लेखक: अशोक कुमार | आवाज़: के.सी. शंकर प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे रहें…
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कहानीः ग्रे शेड्स- भाग २ (Kahaani: Grey Shades - Part 2)
लेखक: रजनी मोरवाल | आवाज़: राजेश कुमार कहानी दो कैंसर रोगियों के बीच उपजे प्रेम की है जो जीवन की व्याधि के बीच डायलिसिस डेट्स को अपने प्रेम की डेट्स बना लेते हैं और आधे अधूरे शरीरों के साथ बाकी बचे जीवन में खुशियां तलाशते हैं । इस अनूठी प्रेम कहानी के बारे में जानने के लिए सुनें रजनी मोरवाल की…
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कविता: डरा हुआ व्यक्ति (Kavita: Dara Hua Vyakti)
लेखक: अशोक कुमार | आवाज़: के.सी. शंकर, शाश्विता शर्मा, ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह...
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कहानीः ग्रे शेड्स- भाग १ (Kahaani: Grey Shades - Part 1)
लेखक: रजनी मोरवाल | आवाज़: राजेश कुमार कहानी दो कैंसर रोगियों के बीच उपजे प्रेम की है जो जीवन की व्याधि के बीच डायलिसिस डेट्स को अपने प्रेम की डेट्स बना लेते हैं और आधे अधूरे शरीरों के साथ बाकी बचे जीवन में खुशियां तलाशते हैं । इस अनूठी प्रेम कहानी के बारे में जानने के लिए सुनें रजनी मोरवाल की…
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कविता: निशा गीत (Kavita: Nisha Geet)
लेखक: लुईस ग्लूक | अनुवाद - झरना मालवीय | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम'…
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कहानीः उलझन (Kahaani: Uljhan)
लेखक: मधु कांकरिया | आवाज़: शाश्विता शर्मा नायिका का सहपाठी जो उसका सबसे भरोसेमंद दोस्त है,उसको प्रेम पत्र लिखता है। नायिका की उलझन है कि वह इस अनचाहे प्रेम पत्र का जवाब कैसे दे ?वह न उसे प्रेमी की तरह स्वीकार कर पाती है और न ही दोस्ती को दांव पर लगाना चाहती है। प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’...
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कविता: मैं अमर बेल हूँ (Mein Amar Bael Hu)
लेखक: किरण अग्रवाल | आवाज़: शाश्विता शर्मा प्रेमचंद द्वारा शुरू की गयी ‘हंस’ पत्रिका भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रगतिशील मासिक पत्रिका है। अब हंस ऑडियो की दुनिया में उड़ान भर रही है ‘हंस वाणी’ के रूप में, जिसे अपनी आवाज़ से सजा रहें हैं मुंबई के रंगमंच समूह 'जश्न-ए-क़लम' के कलाकार और मंच दे...
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