Kahani Wali Kudi !!!(कहानी वाली कुड़ी)
by Sukhnandan Bindra
*कहानीनामा( Hindi stories),*स्वकथा(Autobiography)*कवितानामा(Hindi poetry),*शायरीनामा(Urdu poetry)★"The Great" Filmi show (based on Hindi film personalities)मशहूर कलमकारों द्वारा लिखी गयी कहानी, कविता,शायरी का वाचन व संरक्षण★फिल्मकारों की जीवनगाथा★स्वास्थ्य संजीवनी
Episodes
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Last epi-9 "सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी
क्या सोचा सकीना ने? सकीना अशरफ़ के साथ गई ? क्या था सकीना का मक़सद ए ज़िंदगी?
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क्या करे सकीना ???
सकीना हमारे आसपास का ही अफ़साना है ,सुनिए सकीना की सिलसिलेवार कहानी और अपनी राय दीजिए कि सकीना क्या करे ? किस्मत नेे एक बार फिर अशराफ़ के सामने ला खड़ा किया है , क्या सकीना अशराफ़ के साथ चली जाए ? या उसे आईना दिखाए ? किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले 1 से 8 तक "सकीना" मक़सद ज़िंदगी का ,अफ़साना की सिलसिले…
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EPI -8 "सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी
आज एक बार फिर अशराफ़ सकीना के सामने था । क्या करेगी सकीना ? क्या अशरफ़ सकीना को साथ ले जाएगा? क्या सकीना उसके साथ जाएगी?
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EPI-7 "सकीना"- मक़सद ए ज़िंदगी
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ऐसा क्या हुआ जिससे सकीना के लिए सारे रास्ते बंद हो गए थे , मैडम रायज़ादा ने क्या किया कि 10 साल के भीतर सकीना कुछ और ही बन गई .... क्या था सुभान साहब के मेल में जो सकीना को मुसलसल बेचैन किए हुए था , कौन था वो शख्स जो सुभान साहब के साथ स्कूल के जलसे में आने वाला था...
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epi 6 "सकीना" मक़सद-ए-ज़िंदगी
ज़िंदगी के तज़ुर्बात ने सकीना को ऐसे सबक सिखाए थे जो उसकी उम्र मुक़ाबले बड़े थे। सारी राहें उसके लिए ला-रास्ता थीं। क्या करे सकीना, कहां जाए सकीना उसे रहनुमा की ज़रूरत है, बराये मेहरबानी 🙏 उसकी मदद करें, कमेंट्स में अपनी राय लिखें
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epi -5"सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी
हालात सकीना को उस दायरे में ले आए हैं जहां से कोई राह नहीं निकलती, क्या करे सकीना? अपनी राय दीजिए🙏
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"सकीना"- मक़सद ए ज़िंदगी (चौथी किस्त)
कम तालीमयाफ्ता सकीना निकाह के बाद अशरफ़ के साथ गुरुग्राम आ गई । शहर में जिंदगी किस रूप को धर के उसके सामने आई....
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"सकीना" मक़सद -ए -ज़िंदगी (तीसरी किस्त)
वक़्त जैसा भी हो, बदलता ज़रूर है। बेहद मामूली सी, कम तालीम-याफ़्ता यतीम सकीना निकाह के बाद उस दुनिया में थी जिसके बारे में उसने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था। आलीशान हवेली के इकलौते वारिस से निकाह कर जहाँ बेशुमार दौलत और ऐश-ओ-आराम मयस्सर था, वहीं अशरफ़ का रवैया कुछ खिंचा-खिंचा सा था। लेकिन वो...
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"सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी, दूसरी किस्त
स्कूल के ट्रस्ट्री सुभान साहब ने सकीना को एक मेल भेजा ,मेल पढ़ कर सकीना यक -ब -यक पत्थर सी हो गयी ,उसने आँखें बंद कर लीं, गुज़िश्ता यादों के हुज़ूम ने उसे घेर लिया , कौन थी सकीना ,क्या था उस मेल में कि सब कुछ फिल्म की मानिंद उसकीआँखों के सामने से गुज़रने लगा था........
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"सकीना" --मक़सद ए ज़िंदगी (पहली किस्त)
सकीना" ( मक़सद ज़िंदगी का)की पहली किस्त कौन है सकीना सुभान साहब के ईमेल में ऐसा क्या था कि यक-बा-यक सकीना हैरान -ओ -परेशान हो गई । जानने के लिए सुनिये अगले हिस्से
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भारत का लाल
Bharat ka laal is the memoir of Shri LAL BAHADUR SHASTRI when He was serving as a Railway minister of india .This memoir reflects his principled behavior. Lal Bahadur Shastri (2 October 1904 – 11 January 1966) was an Indian politician and statesman who served as the a prime minister of India from...
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टाइल बनाम मूर्ति
social media story
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स्वकथा रसीदी टिकट epi -33 (अंतिम भाग)
मेरे मन का ठीक यही आलम था,जब मैंने कहा, रसीदी टिकट का कायाकल्प होना चाहिए। बहुत सारी घटनाएं और नाम ग़ैर - ज़रूरी हैं। अगले सालों में उन हादसों से भी कहीं बड़े हादसे हुए। अभी भी हो रहे हैं, पर सारा विस्तार ग़ैर ज़रूरी है। बात स्याह ताक़त की है, जो यह सब कुछ करवाती है। अपनी किसी उदासी से मुझे…
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स्वकथा, रसीदी टिकट epi-30
इमरोज़ एक दूधिया बादल है,चलने के लिए वह सारा आसमान भी खुद है,और पवन भी ख़ुद है, जो उस बादल को दिशा मुक्त करती है...... ---- अमृता प्रीतम रसीदी टिकट
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स्वकथा, रसीदी टिकट epi-32
मैं इमरोज़ के चेहरे की ओर ऐसे देख रही थी जैसे कृष्ण को देख रही होऊं।कृष्ण भी वेद से फ़िक्रमंद हुए थे ,पर बुद्ध जी तरह नहीं।कृष्ण ने वासनामय पूजा पाठ से पार जाने की बात कही थी,और आज इमरोज़ भी ज़िंदगी के स्वीकार के साथ केह रहे थे, ' अमृता ,तूने इस उदासी के पार जाना है।जो होता है, होने दे! क़त्ल भी...
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स्वकथा, रसीदी टिकट epi-31
मैं क़लम और काग़ज़ वहीं छोड़ कर, नीचे आंगन में चली गई, और रोज़ की तरह ,उनके साथ फूल चुनने लगी..... मन में अपनी ही इबारत के अक्षर समाए हुए थे. इस तरह के बहुत प्यारे और नाज़ुक पल जीने के लिए होते हैं, लिखने के लिए नहीं....
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स्वकथा, रसीदी टिकट epi-29
गंगा से वोदका तक यह सफ़रनामा है मेरी प्यास का। यूनेस्को कॉन्फ्रेंस की एक घटना का ज़िक्र करना चाहती हूं जहां अलग अलग देशों से एक एक डेलीगेट था।भारत जी और से मैं अकेली थी।कॉन्फ्रेंस का मकसद था , "Science and Spirituality should go together" और इसका तर्क था ......
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स्वकथा, रसीदी टिकट epi-28
हमारा इतिहास कहता है कि जब समुद्र - मंथन किया गया, तो उससे चौदह रत्न मिले थे, लेकिन आज वक्त की ज़रूरत है कि हम अपने अपने मन सागर का मंथन करें,और अपनी -अपनी आचरण शक्ति खोज लें।
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स्वकथा रसीदी टिकट epi -27
ज़हनी और रूहानी विकास एक लंबा सिलसिला होता है,घर - परिवार चेतना के विकास की ज़मीन बनता है,इस ज़मीन पर संस्कारों के पेड़ पनपते हैं और इन्हीं पेड़ों में घिरी हुई चेतना की ज़मीन पर अंतर्मन की एक झील बहती है कि उसके ज़ोर से....... ----- अमृता प्रीतम,रसीदी टिकट
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स्वकथा epi -26 (Rasidi Ticket part- 26)
मैंने बार बार एक ही लफ़्ज़ लिखा था साहिर... साहिर... साहिर...। इस दीवानगी के बाद घबराहट हुई कि सवेरे जब अखबार में तस्वीर छपेगी ,तस्वीर वाले काग़ज़ पर यह नाम पढ़ा जायेगा ,कैसी क़यामत आएगी। साहिर मुझ से मिलने आता था ,आकर चुपचाप सिगरेट पीता रहता था। राखदानी जब टुकड़ों से भर जाती थी तो चला जाता था ,और उसके...
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रसीदी टिकट epi-25
मेरे पास जो कुछ था,अगर आज बर्फ़ से दब गया है,तो ये बर्फ़ जब पिघलेगी,इसके नदी नाले वे होंगे जो एक ईमान से ,हाथों में नए कलम थामेंगे,और उन कलमों की शिद्दत में मेरा वह कुछ भी सम्मिलित होगा ,जो आज चुप की बर्फ़ के नीचे दबा हुआ है।
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अपराधी कौन
ग़लतफ़हमियों से भी मर जाते हैं रिश्ते... हर बार कसूर गलतियों का नहीं होता what's up Zindagi में हैं वो कहानियां जो हम पढ़ते है सोशल मीडिया पर, ये कहानियां whatsapp पर खूब शेयर की जाती हैं। ये कहानियां कहां से आती हैं,इनको किसने लिखा है यदि आपको ज्ञात हो तो प्रमाण सहित कमेंट्स में बताएं। description...
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"The Great" Filmi Show "KEDAR SHARMA"
केदार शर्मा हिंदी फिल्म जगत की नीव का पत्थर कहे जाते हैं। मूक फिल्मों के दौर से लेकर सन 1990 दशक तक हिंदी सिनेमा के हर दौर के साक्षी रहे केदार शर्मा फिल्मों के हर पक्ष के जानकार थे। अभिनेता ,फिल्म निर्माता- निर्देशक लेखक और गीतकार केदार शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी फनकार हुए हैं। केदार शर्मा पर...
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.जुबान (Zuban)
तल्ख़ कर दी है ज़िंदगी जिस ने कितनी मीठी ज़बान है प्यारे, जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें ये हमारी ज़बान है प्यारे
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एक से दस(Ek se Dus)
what's up Zindagi में हैं छोटी छोटी कहानियां, वो कहानियां जो शेयर की जाती हैं सोशल मीडिया के बड़े बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर,वो कहानियां जो शेयर की जाती हैं व्हाट्सएप पर। ये कहानियां कहां से आती हैं , इन्हे किसने लिखा है इस बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। यदि लेखक का पता चले तो प्रमाण सहित मेल करें,लेखक…
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रसीदी टिकट epi-24 (Rasidi Ticket ,Amrita Pritam's biography part 24)
एक उड़ता हुआ कबूतर आया और उसने मेरी गोद में शरण ली। देख उसके पीछे एक बाज भी था,और वह मुझसे कबूतर को मांग रहा था। बाज ने कहा ,'अगर कबूतर नहीं देती तो अपने बदन का मांस तोल कर दे दे।' मेरी सारी रचनाएँ ,क्या कविता और क्या कहानी और क्या उपन्यास ,मैं जानती हूँ ,एक नाजायज़ बच्चे की तरह हैं मेरी दुनिया की...
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रसीदी टिकट Epi-23 (Rasidi Ticket,Amrita Pritam's Biography part -23)
एक कटोरी धूप को मैं एक घूँट में ही पी लूँ और एक टुकड़ा धूप का मैं अपनी कोख में रख लूँ ..... और सूरज से धारण किए गर्भ में से सूरज के पैदा होने तक यह ज़िक्र पहुंचा ..... कोठरी दर कोठरी मैं रोज़ सूरज को जन्म देती ......... ------रसीदी टिकट पृष्ठ संख्या १०८
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रसीदी टिकट Epi -22 (Rasidi Ticket ,Amrita pritam's Biography part-22)
'ओन' सूरज का एक नाम था ,इसी लिए फ़िनिशियन्स ने जब यूरोप में एक नयी धरती की खोज की ,उसका नाम ऐल -ओन-डोन रखा ,जो आज लन्दन हैं। इंग्लैंड की जड़ें हिब्रू भाषा में हैं। बैल के लिए हिब्रू भाषा में 'ऐंगल' शब्द हैं। नई खोजी हुई धरती को उन्होंने ऐंगल-लैंड का नाम दिया ,जो आज इंग्लैंड है। नींद के होठों से…
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रसीदी टिकट Epi -21 (Rasidi Ticket ,Amrita pritam's Biography part-21)
1975 में मेरे उपन्यास "सागर और सीपियाँ के आधार पर जब 'कादम्बरी' फिल्म बन रही थी तो उसके डायरेक्टर ने मुझसे फिल्म का गीत लिखने के लिए कहा। ... जब मैं गीत लिखने लगी तो अचानक वह गीत सामने आ गया ,जो मैंने 1960 में इमरोज़ से पहली बार मिलने पर अपने मन की दशा के बारे में लिखा था। ..... तब मुझे लगा जैसे...
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रसीदी टिकट -Epi-20 (Rasidi ticket, Amrita Pritam's biography part 20
एकाग्र मन हो कर इश्वर से कहा था कि 'मेरी माँ को मत मारो' विश्वास हो गया था कि अब मेरी माँ की मृत्यु नहीं होगी ,क्योंकि ईशवर बच्चों का कहा नहीं टालता ,पर माँ की मृत्यु हो गयी दो औरतें हैं ,जिनमें एक औरत शाहनी है और दूसरी एक वेश्या ,शाह की रखेल............. उस समय मैं भी वहां थी ,जब यह पता चला कि...
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रसीदी टिकट Epi --19 (Rasidi Ticket ,Amrita pritam's Biography)
मैं जब रोमानिया से बल्गारिया जा रही थी ,रात बहुत ठंडी थी ,पास में अपने कोट के सिवाय कुछ नहीं था ,वही घुटने जोड़ कर ऊपर तान लिया था ,फिर भी जब उसे सर करर और खींचती थी ,तो पैरों में ठिठुरन लगती थी। न जाने कब मुझे नींद आ गयी। लगा ,सारे शरीर में गर्मी आ गयी हैं। बाकी रात खूब गर्माइश में सोती रही…
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रसीदी टिकट ,भाग-18 Rasidi Ticket,Amrita pritams's Biography,EPI-18)
यह मेरी ज़िन्दगी में पहला समय था, जब मैंने जाना कि दुनिया में मेरा भी कोइ दोस्त है, हर हाल में दोस्त ,और पहली बार जाना कि कविता केवल इश्क़ के तूफ़ान से ही नहीं निकलती ,यह दोस्ती के शांत पानियों में से भी तैरती हुई आ सकती है। उस रात को उसने नज़्म लिखी थी --"मेरे साथी ख़ाली जाम ,तुम आबाद घरों के वासी…
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रसीदी टिकट, भाग -17 (Rasidi Ticket ,Amrita Pritam's biography,epi-17)
.गर्मी हो या सर्दी मैं बहुत से कपडे पहन कर नहीं सो सकती। सो रही थी ,जब यह फोन आया था। उसी तरह रजाई से निकल कर फोन तक आयी थी। लगा ,शरीर का मांस पिघल कर रूह में मिल गया है ,और मैं प्योर नेकेड सोल वहां खड़ी हूँ....... उस रेतीले स्थान पर दो तम्बू लगे हुए थे। मेरी आँखों के सामने तम्बू के अंदर का दृश्य...
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रसीदी टिकट -भाग -16 (Rasidi ticket, Amrita pritam's biography, epi-16)
समरकंद में मैंने भी ऐसी ही बात वहां के लोगों से पूछी थी कि आपका इज़्ज़त बेग़ जब हमारे देश आया और उसने एक सुन्दर कुम्हारन से प्रेम किया ,तो हमने में कई गीत लिखे। क्या आपके देश में भी उसके गीत हैं ? तो वहां एक प्यारी सी औरत ने जवाब दिया ,हमारे देश में तो एक अमीर सौदागर का बेटा था ,और कुछ नहीं। प्रेमी…
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रसीदी टिकट -भाग -15 (Rasidi ticket,Amrita pritam's biography ,epi--15)
इथोपिया के प्रिंस का मन छलक उठा "आप कवि लोग भाग्यशाली हैं वास्तविक संसार नहीं बसता तो कल्पना का संसार बसा लेते हैं ,मैं बीस बरस वॉयलान बजाता रहा ,साज़ के तारों से मुझे इश्क़ है ,पर युद्ध के दिनों में मेरे दाहिने हाथ में गोली लग गयी थी ,अब मैं वॉयलान नहीं बजा सकता ,संगीत जैसे मेरी छाती में जम गया…
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रसीदी टिकट --भाग 14 (Rasidi Ticket ,Amrita Pritam's biography epi-14
टॉलस्टॉय की एक सफ़ेद कमीज़ टंगी हुई है। पलंग की पट्टी पर मैं एक हाथ रखे खड़ी थी कि ....... दाहिने हाथ की खिड़की से हल्की सी हवा आयी ..... और ुउस टंगी हुई कमीज की बांह मेरी बांह से छू गयी ..... एक पल के लिए जैसे समय की सूईयाँ पीछे लौट गयीं , 1966 से 1910 पर आ गयीं और मैंने देखा शरीर पर सफ़ेद कमीज पहन…
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रसीदी टिकट --भाग 13 (Rasidi Ticket , Amrita pritam's biography epi--13)
अजीब अकेलेपन का एहसास है। हवाई जहाज़ की खिड़की से बाहर देखते हुए अच्छा लगता है ,जैसे किसी ने आसमान को फाड़कर उसके दो भाग कर दिए हों। प्रतीत होता है -- फटे हुए आसमान का एक भाग मैंने नीचे बिछा लिया है ,और दूसरा अपने ऊपर ओढ़ लिया है सोफ़िया के हवाई अड्डे पर बिलकुल अजनबी सी खड़ी हूँ। अचानक किसी ने लाल…
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"रसीदी टिकट"-- भाग 12 ("Rasidi Ticket" Amrita pritam's biography part -12)
हमने आज ये दुनियां बेची .... और दीन खरीद लाये ... बात क़ुफ़्र की ,की है हमने ... सपनों का इक थान बुना था.... गज़ एक कपड़ा फ़ाड़ लिया ... और उम्र की चोली सी ली हमने .... अंबर की इक पाक सुराही ... बादल का इक जाम उठाकर ... घूँट चांदनी पी है हमने ....हमने आज ये दुनिया बेची। ........ मैं औरत थी चाहे बच्ची…
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"खुशियों भरी पासबुक"
छोटी-छोटी कहानियां, वो कहानियां जो हम पढ़ते है सोशल मीडिया के बड़े बड़े प्लेटफ़ॉर्मस पर, छोटी छोटी कहानियां हमारे जीवन का आईना होती हैं ,इनमें हमारा अक्स दिखता है। छोटी छोटी कहानियां हमें बड़ी बड़ी सीख दी जाती हैं। सुनिये छोटी सी कहानी "खुशियों भरी पासबुक"
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स्वकथा - "रसीदी टिकट" -- भाग 11 ( "Rasidi Ticket" Amrita pritam's biography part- 11)
एक सपना और था जिसने मेरी उठती जवानी को अपने धागों में लपेट लिया था। हर तीसरी या चौथी रात देखती थी कोइ दो मंज़िला मकान है, वो बिलकुल अकेला ,आसपास कोइ बस्ती नहीं ,चारो ओर जंगल है और जहाँ वो मकान है उसके एक तरफ नदी बहती है...... नदी की ओर उस मकान की दूसरी मंज़िल की एक खिड़की खुलती है। जहाँ कोई खड़ा…
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स्वकथा --"रसीदी टिकट" भाग -10 (Amrita Pritam's biography epi-10)
महारानी एलिज़ाबेथ जिस युवक से मन ही मन प्यार करती हैं ,उसे जब समुद्री जहाज़ देकर काम सौंपती हैं ,तो दूरबीन लगाकर जाते हुए जहाज़ को देखकर परेशान हो जाती हैं । देखती हैं कि नौजवान प्रेमिका भी जहाज़ पर उसके साथ है। वे दोनों डैक पर खड़े हैं ,उस समय महारानी को परेशान देखकर उसका एक शुभचिंतक कहता है ,'मैडम !...
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स्वकथा--"रसीदी टिकट" भाग-9 ( Rasidi ticket, Amrita pritam's biography epi-9)
किसी बहुत ऊंची ईमारत के शिखर पर मैं अकेले खड़े हो कर अपने हाथ में लिए हुए कलम से बातें कर रही थी --- 'तुम मेरा साथ दोगे ? --कितने समय मेरा साथ दोगे ?' अचानक किसी ने कसकर मेरा हाथ पकड़ लिया। 'तुम छलावा हो ,मेरा हाथ छोड़ दो।' मैंने कहा , और ज़ोर से अपना हाथ छुड़ाकर उस ईमारत की सीढ़ियां उतरने लगी। मैं बड़ी...
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स्वकथा--"रसीदी टिकट" भाग -8 (Rasidi ticket ,Amrita pritam's biography,epi -8 )
कहते हैं एक औरत थी। उसने बड़े सच्चे मन से किसी से मोहब्बत की। एक बार उसके प्रेमी ने उसके बालों में लाल गुलाब का फूल अटका दिया। तब औरत ने मोहब्बत के बड़े प्यारे गीत लिखे। 'वह मोहब्बत परवान नहीं चढ़ी। उस औरत ने अपनी ज़िंदगी समाज के गलत मूल्यों पर न्योछावर कर दी। एक असहाय पीड़ा उसके दिल में घर कर गयी,और…
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स्वकथा -"रसीदी टिकट" भाग -7 ("Rasidi Ticket",Amrita Pritam's biography, epi-7)
लाहौर में जब कभी साहिर मिलने के लिए आता था ,तो जैसे मेरी ही ख़ामोशी में से निकला हुआ खामोशी का एक टुकड़ा कुर्सी पर बैठता था और चला जाता था..... वह चुपचाप सिगरेट पीता रहता था ,कोई आधी सिगरेट पी कर राखदानी में बुझा देता था ,फिर नयी सिगरेट सुलगा लेता था ,और उसके जाने के बाद केवल सिगरटों के बड़े -बड़े...
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स्वाकथा - "रसीदी टिकट" भाग - 6 ( "Rasidi Ticket" ,Amrita Pritam's biography ,epi-6)
दुखों की कहानियां कह -कहकर लोग थक गए थे ,पर ये कहानियां उम्र से पहले ख़त्म होने वाली नहीं थीं। मैंने लाशें देखी थीं ,लाशों जैसे लोग देखे थे ,और जब लाहौर से आकर देहरादून में पनाह ली ,तब नौकरी की और दिल्ली में रहने के लिए जगह की तलाश में दिल्ली आयी ,और जब वापसी का सफर कर रही थी ,तो चलती हुई गाड़ी में...
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स्वकथा -"रसीदी टिकट" भाग- 5 ("Rasidi Ticket", Amrita Pritam's biography epi-5)
एक लंबा और सांवला सा साया था ,जब मैंने चलना सीखा ,तो मेरे साथ साथ चलने लगा। एक दिन वो आया ,तो उसके हाथ में एक काग़ज़ था ,उसकी नज़्म का। उसने नज़्म पढ़ी और वो काग़ज़ मुझे देते हुए जाने क्यों उसने कहा --" इस नज़्म में जिस जगह का ज़िक्र है ,वो जगह मैंने कभी देखी नहीं, और नज़्म में जिस लड़की का ज़िक्र है , वो…
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"वह लड़की" --सआदत हसन मंटो लिखित कहानी
सुरेंद्र दिल ही दिल में बहुत ख़फ़ीफ़ हो रहा था,उसने एक बार बुलंद आवाज़ में उस लड़की को पुकारा ,"ए लड़की !" लड़की ने फिर भी उसकी तरफ न देखा. झुंझला कर उसने अपना मलमल का कुरता पहना और नीचे उतरा।जब उस लड़की के पास पहुंचा तो वो उसी तरह अपनी नंगी पिंडली खुजला रही थी. सुरेंद्र उसके पास खड़ा हो गया। लड़की ने एक…
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स्वकथा-"रसीदी टिकट"भाग-4("Rasidi Ticket",Amrita pritam's biography epi-4)
ख़ुदा की जिस साज़िश ने यह सोलहवां वर्ष किसी अप्सरा की तरह भेज कर मेरे बचपन की समाधि भंग की थी, उस साज़िश की मैं ऋणी हूँ,क्योंकि उस साज़िश का संबंध केवल एक वर्ष से नहीं था, मेरी सारी उम्र से है।----अमृता प्रीतम,{रसीदी टिकट,---पाठ-6 ,सोलहवाँ साल
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स्वकथा -"रसीदी टिकट" भाग- 3 ("Rasidi Ticket", Amrita Pritam's biography epi-3)
बाहर जब शारीरिक तौर पर मेरी बचकानी उम्र उनके पितृ -अधिकार से टक्कर न ले सकती ,तब मैं आलथी -पालथी मार के बैठ जाती ,आँखें मीच लेती ,पर अपनी हार को अपने मन का रोष बना लेती ---'आँख मीच कर अगर मैं ईश्वर का चिंतन न करूँ ,तो पिता जी मेरा क्या कर लेंगे ? जिस इश्वर ने मेरी वह बात नहीं सुनी,अब मैं उससे कोई...
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स्वकथा -"रसीदी टिकट" भाग- 2 ("Rasidi Ticket", Amrita Pritam's biography epi-2)
ये एक वह पल है .... ...... रसोई में नानी का राज होता था ,सबसे पहला विद्रोह मैंने उसी के राज में किया ........ न नानी जानती थी न मैं , की बड़े होकर ज़िन्दगी के कई बरस जिससे मैं इश्क़ करुँगी वह उसी मज़हब का होगा ,जिस मज़हब के लोगों के लिए घर के बर्तन भी अलग रख दिए जाते थे ------अमृता प्रीतम ,रसीदी टिकट...
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*कहानीनामा( Hindi stories),*स्वकथा(Autobiography)*कवितानामा(Hindi poetry),*शायरीनामा(Urdu poetry)★"The Great" Filmi show (based on Hindi film personalities)मशहूर कलमकारों द्वारा लिखी गयी कहानी, कविता,शायरी का वाचन व संरक्षण★फिल्मकारों की जीवनगाथा★स्वास्थ्य संजीवनी
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Sukhnandan Bindra