PODCAST · arts
StorywithNeety
by Neety
Love to read story and like to do creative things
Episodes
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अलिफ लैला
इस गीत को बचपन में हम सब ने कई बार दूरदर्शन के धारावाहिक अलिफ़ लैला में अवश्य ही सुना होगा।अलिफ लैला की कहानी अरब देश की एक प्रचलित लोक कथा है जो पूरी दुनिया में सदियों से सुनी व पढ़ी जाती रही है। 'अलिफ लैला' भारत में अपने अरबी नाम "अल्फ लैला" के प्रचलित बिगड़े हुए रूपके नाम से अधिक जाना जाता है।...
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पौराणिक कथाएं
किस्से-कहानियों का संसार अद्भुत है। कल्पना शक्ति का विकास करने वाली कथाएँ कहीं ना कहीं बाल मन में अच्छे गुणों के बीज भी बोती हैं। इतिहास ऐसी रोचक और शिक्षावर्धक कहानियों से भरा पड़ा है। ऐसी कहानियों को पौराणिक कथाएं (Mythological Stories) कहा जाता है।विश्व भर में कई तरह की संस्कृति व सभ्यताएं हैं…
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प्रेमा (मुनशिप्रेमचंद)
प्रेमा (उपन्यास) : मुंशी प्रेमचंद Prema (Novel): Munshi Premchand
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हिन्दी कहानियाँ और उपन्यास: किशोरीलाल गोस्वामी Hindi Stories and Novels
किशोरी लाल गोस्वामी जी (1865 ई.-1932 ई.) का जन्म वृंदावन के एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। इनका परिवार निम्बार्क सम्प्रदाय का अनुयायी था। किशोरी लाल गोस्वामी के पितामह वृंदावन के सर्वश्रेष्ठ विद्वान् एवं आचार्य थे। किशोरी लाल गोस्वामी के नाना वाराणसी के संस्कृतज्ञ थे। इन्हीं से…
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गोदान (मुंशी प्रेमचन्द)
मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880–8 अक्तूबर 1936) का जन्म वाराणसी से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फ़ारसी पढ़ने से हुआ और रोज़गार का पढ़ाने से। 1898 में मैट्रिक की परीक्षा के पास करने के बाद वह एक स्थानिक पाठशाला में अध्यापक नियुक्त हो…
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वैशाली की नगर वधू वैशाली की नगरवधू (बौद्धकालीन ऐतिहासिक उपन्यास) : आचार्य चतुरसेन शास्त्री
यह सत्य है कि यह उपन्यास है। परन्तु इससे अधिक सत्य यह है कि यह एक गम्भीर रहस्यपूर्ण संकेत है, जो उस काले पर्दे के प्रति है, जिसकी ओट में आर्यों के धर्म, साहित्य, राजसत्ता और संस्कृति की पराजय और मिश्रित जातियों की प्रगतिशील संस्कृति की विजय सहस्राब्दियों से छिपी हुई है, जिसे सम्भवतः किसी…
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प्रस्तुत है मुंशी प्रेमचंद जी की अनमोल कहानियां।
मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880–8 अक्तूबर 1936) का जन्म वाराणसी से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फ़ारसी पढ़ने से हुआ और रोज़गार का पढ़ाने से। 1898 में मैट्रिक की परीक्षा के पास करने के बाद वह एक स्थानिक पाठशाला में अध्यापक नियुक्त हो…
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लोक कथाएं
लोककथाओं का प्रमाण मिलना मुश्किल है कि वह कहा कि है। क्योंकि ये चलती हवा सी है। जो मन को सुकून देती हैं। लेकिन जानना मुश्किल है। कि किस और से आती है।
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देवकीनन्दन खत्री का रोमांचक उपन्यास (कुसुम कुमारी)
ये उपन्यास खत्री जी द्वारा लिखे प्रेममयी उपन्यासों में से एक है। उपन्यास की शुरुआत में आप देखेंगे कि कैसे नायक को एक पत्थर की मूर्ति से प्रेम हो जाता है। दोस्ती भी दुश्मनी में बदल जाती है जब मामला प्रेम के हो एक हसीना दीवाने कई। इश्क की कहानी है ये कुसुम कुमारी भाग।
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कर्नाटक की लोक कथाएं
लोक कथाएं पहले के दशक में मनोरंजन का मुख्य साधन थी। ये कथाएं कैसे और कहां से उत्पन्न होती है परंतु जब सुनने लगों तो सब सच ही लगती है। तो आप आनंद उठाइए इन कथाओं का मेरे साथ यानी आपकी नीति के साथ
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महादेवी वर्मा जी की अनमोल कहानियां
इनकी कहानिया बहुत ही मार्मिक चित्रण पर आधारित है। ज्यादातर आत्मविश्लेषण की झलक इनकी लेखनी में झलकती है। गौरा गाय कहानी में इन्होंने ग्वालों की लालच और लालच वश किए कुकृत्य को दर्शाया है। बाकी कहानियां भी ऐसी है। जरूर सुने
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जन्नेंद्र कुमार जी की अनमोल कहानियां जिन्हे में आप सबके लिए लेकर आई हूं।
जैनेंद्र कुमार जी हिंदी साहित्य के ऐसे लेखकों में से है जिनकी अधिकतर कहानियां उनके जीवन से ही प्रभावित हुई है। आइए हम भी उनकी लेखनी के माध्यम से जीवन के उनके नजरिए को देखते हैं
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भूतनाथ (देवकीनंदन खत्री)
भूतनाथ उपन्यास का उल्लेख देवकी जी ने चंद्रकांता संतति में ही कर दिया था। ये उपन्यास चंद्रकांता संतति के प्रमुख किरदार भूतनाथ की जीवनी पर आधारित है। आपको याद होगा की वीरेंद्र सिंह और उनके पिता के लाख पूछने पर भी भूतनाथ ने अपने बारे में कुछ ना बता कर ये कहा था कि वो अपनी बेगुनाही अपनी जीवनी लिख कर...
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मंगलसूत्र (मुनशिप्रेमचंद)
ये उपन्यास ही था जिसे मुंशी जी पूरा नहीं कर पाए थे। इस उपन्यास का नाम मंगलसूत्र तो था लेकिन किसी भी भाग में मंगलसूत्र का जिक्र नहीं आया । मुझे इसे आधा पढ़ने का बडा खेद है। ऐसे लगा मानो कुछ छूट गया हो। आप भी सुने
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कटौरा भर खून (बाबू देवकीनंदन खत्री)
ये उपन्यास बाबू देवकीनंदन खत्री जी द्वारा रचित हैं। ये उपन्यास एक ऐसे राजा पर आधारित है जिसे वहा की रियाया पसंद नहीं करती। बीरसिंह नाम का दीवानेखास राजा के बेटे के खून मे गिरफ्तार होता है। राजा अपने बेटे के कातिल को कातिल नही मानता क्योंकि बिरसिंह को उसने अपने बेटे जैसे पाला है। फिर आख़िर क्या…
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असम की लोक कथाएं
कहानियां सामाजिक पृष्ठ भूमि को दर्शाती हैं साथ ही ये रिश्तों के महत्व को भी दिखाती हैं तो हर कहानी हमारे अपने प्रांत की लगती है
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कुछ अनकही कहानियां
कहानियां हमारी जीवन के आईना होती है सुने जरूर मेरे साथ
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भक्ति की राह (प्रचलित व्रत कथाएं ) और कथाएं
ये कथाएं जीवन मे आस्तिकता को बढ़ाकर मनुष्य को सत्यमार्ग पर चलना सिखाती है । ये कथाएं मनुष्य के ईश्वरीय विश्वास की डोर को और मजबूत करती हैं
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बारिश हुई मोर नाचा 'लोक कथाएं सुने और सुनाए क्योंकि इससे एक अलग सा दिमागी सुकून मिलता है।
लोक कथाओं को सुनने और सुनाने का अलग ही सुकून है। अब जैसे बारिश हुई मोर नाचा कहानी हमारे बचपन के सवालों का जवाब देती हैं
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लोक कथाएं को सुनने और कहने का एक अलग ही सुकून है। तो आप भी अपना कुछ समय निकाल कर इन्हे जरूर सुने
ये लोककथाएं स्पेन की और स्विजरलेंड से संबंधित मानी जाती है परंतु इसका कोई प्रमाण नहीं है तो बस इसे आप सिर्फ़ कहानी की तरह सुने सभी कहानियां बहुत रोचक है
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उत्तर प्रदेश की लोक कथाएं ( उस देश के लोगो द्वारा कही और सुनी कथाएं)
लोक कथाएं सुनना और कहना वर्षो पहले प्रचलित था अब तो मोबाइल और नेटवर्क ने सबको इतना व्यस्त कर दिया है कि उठना तो मोबाइल सोना तो मोबाइल। तो क्यों न इस मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर अपने बचपन को याद करे और अपने बच्चो का बचपन उन्हें जीने के अवसर दे
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अरुणाचल प्रदेश की लोक कथाएं कहानियां ऐसी की बचपन याद आ जाए
लोक कथाएं अकसर मानवीय मान्यताओं पर निर्धारित होती है। जो किसी ना किसी सच्चाई को प्रगट करती है
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लोककथाएं फुर्र फुर्र ; अजगर, तीन पुतले, चतुराई, पंछी बोले चारो पहर आलसियों का आश्रम, दरख्वत रानीआलस
ये लोककथाएं इतनी पुरानी है की कोई भी नही कह सकता की ये कितनी पुरानी है फिर भी ये एक देश से दूसरे देश में एक कान से दूसरे कान tk पोहंचती रहने के कारण नवीनता का रूप ले लेती हैं ये लोककथाएं बोहत ही रोचक है
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चंद्रकांता संतति आखिरी अध्याय (देवकीनंदन खत्री )
उपन्यास के इस अध्याय में आप वही देखेंगे जो आप आशा करते हो यानी Happy ending जी हां आप जानेंगे तिलिस्म के कैदियों का परिचय और उन पर दरोगा द्वारा किए गए। असहनीय जुल्म।
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चंद्रकांता संतति अध्याय 22 (देवकीनंदन खत्री)
अब ये भाग समाप्ति की तरफ बढ़ रहा है इसलिए इस भाग में पाठको और श्रोताओं के सवालो के जवाब मिलेंगे। जैसे कि राजा गोपालसिंह कैसे कैद हुए। तिलस्म में जो पांच लोग थे उनके किस्से वो कैसे वहा पहुंचे। ये सब
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चंद्रकांता संतति अध्याय 21 भाग 3(देवकी नंदन खत्री)
उपन्यास के इस भाग में आपको इन्द्र जीत सिंह की शादी किशोरी और आनंदसिंह की शादी कामिनी के साथ होते देखेंगे। और शादी की तैयारी की केफियत तो देखने ही लायक है। परन्तु इनकी सुहागरात पर एक ऐसी घटना हुई जिसने इंदरजीत का बुरा हाल कर दिया क्योंकि सुबह इंदरजीत ने जाना की जिसके साथ वो सोए थे वो किशोरी नही...
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चंद्रकांता संतति अध्याय 20 (देवकीनंदन खत्री)
उपन्यास के इस भाग में कुआंर अन्नांदसिंह और तेजसिंह की वापसी और उनकी शादी का दृश्य आपको देखने को मिलेगा। साथ ही भूतनाथ की स्त्री की असलियत भी खुलेगी
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चंद्रकांता संतति अध्याय 19 (देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप भूतनाथ को नाकाबोपोशो की असलियत मालूम करने की जद्दोजहद करते देखेंगे। और नकाबपोशों को पकड़ने के बाद उनमें उसे अपना पुराना दुश्मन दिलीपसिंह भी मिलेगा जो उसके गुनाहों को जानता है
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चंद्रकांता संतति अध्याय 18 (बाबू देवकीनंदन खत्री)
उपन्यास के इस भाग में इंद्रा अपना किस्सा बयान करेगी कुमारो से , कि वो किस तरह से मनोरमा को अपनी मां समझती रही और फिर कैसे और किसकी मदद से वहा से भागी इसके इलावा आप भूतनाथ के मुकद्दमे की कार्यवाही भी जानेंगे
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चंद्रकांता संतति अध्याय 17 ( बाबू देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप को तिलिस्म के अंदर की कार्य प्रणाली की तस्वीर ही देखने को मिलेगी जिसमे मायारानी और नानक की साजिश के चलते गोपालसिंह की मायारानी के हाथों मौत होना भी आपदेखेंगे। इसके साथ ही आप आनंदी और इन्द्रानी नाम की रानियों की शादी इंद्रजीत सिंह और आनंससिंह से होते हुए देखेंगे कोन है है इन्द्रानी…
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चंद्रकांता संतति अध्याय 16 (देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप भीमसेन को अपने पिता शिवदत्त की मौत का बदला लेते हुए देखेंगे जिसके चलते वो मायारानी से हाथ मिला लेता है। इधर माधवी भी उसका साथ देती नजर आएगी। साथ ही राजा गोपालसिंह के लिए मुश्किलें और बढ़ेगी।
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चंद्रकांता संतति अध्याय 15 (देवकीनंदन खत्री)
मेरे श्रोताओं को में यहां पर ये बतादेना चाहूंगी की इस अध्याय में 15 और 16 अध्याय दोनो ही शामिल है और आइए अब जानते है की इस अध्याय में हमे क्या क्या देखने को मिलेगा तो सबसे पहले मनोरमा का पकड़ा जाना तब संभव होगा जब वो अपने मकसद में कामयाब हो जायेगी । क्योंकि वो कमलिनी किशोरी को मार देगी और यही फिर...
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चंद्रकांता संतति अध्याय 14 (बाबू देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप जानेंगे किस तरह कृष्ण जिन्न ने किशोरी को शिवदत्त की कैद से बचाया । और इसी भाग में शिवदत्त ओर रोहतासगढ के राजकुमार का अंत हो जाएगा। परंतु मनोरमा फिर से अपनी चालों को कामयाब करने हेतु उद्योग कर रही है। जिसके चलते उसने किशोरी का रूप धारण कर उसकी विश्वास पात्र बन गई है
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चंद्रकांता संतति अध्याय 13 (बाबू देवकीनंदन खत्री)
इस अध्याय में आपको भूतनाथ अपने आप को बेगुनाह साबित करने और असली बालभद्रसिंह को ढूंढने की कोशिश करते दिखेंगे जिसके लिए वे राजा गोपालसिंह की सहायता भी लेंगे।एक बार फिर से घात लगा कर बैठे शिवदत्त को विजेन्द्र सिंह पर हमला करते देखेंगे । कैसे बचेंगे 1000 फौज के वार से विजेन्द्र सिंह जानने के लिए सुने...
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चंद्रकांता संतति अध्याय 12 (देवकीनंदन खत्री)
उपन्यास के इस भाग मेंआपको लक्ष्मी देवी के पिता का वृत्तांत सुनने को मिलेगा इसके साथ ही भूतनाथ की चालों का खुलासा होगा जिससे हम जानेंगे की कैसे उसने मायरानी को देवी लक्ष्मी की जगह राजा गोपालसिंह की दुल्हन बना दिया परन्तु सारे सबूत मिलने के बावजूद क्यू भूतनाथ खुद को बेकसूर बता रहा है जानने के लिए...
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चंद्रकांता संतति अध्याय 11 (देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप तारा की असलियत जानेंगे इसी के साथ आपको भूतनाथ की सच्चाई एक ऐसे इंसान से पता चलेगी जिसको मरे हुए वर्षो हो चुके है भगवानी को उसने क्यू भगा दिया था भूतनाथ की कैद से जाने इस अध्याय में
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चंद्रकांता संतति अध्याय अध्याय 10 ) देवकीनंदन)
इस भाग में आप जानेंगे कि कैसे गोपालसिंह और कमलिनी किशोरी और कमला को बचाएंगे साथ साथही मायारानी का भानाफोड होने की वजह से वह देश छोड़ भाग निकलेगी परन्तु किस वजह से वह अपने ही दरोगा की नाक काट डालती हैं ये तो आपको तभी मालूम होगा जब आप इस भाग को सुनेगे।
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चंद्रकांता संतति अध्याय 9 (देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप राजा गोपाल सिंह को तेजसिंह की बरदोलत जीवित देखेंगे । और मायारानी के विनाश से आबाद होने की पूरी दास्तान भी जानेंगे
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चंद्रकांता संतति अध्याय 8 ( देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप भूतनाथ की धोखेबाजी। मायारानी के राज जिसे पांच वर्षो उसने छिपाया था। नागर ओर भूतनाथ के प्रेम किस्से के बारे मे जानने के साथ साथ भूतनाथ का असली व्यक्तित्व भी जानेंगे।
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चंद्रकांता संतति अध्याय 7 (देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप कमलिनी की असलियत और नानक के जीवन के बारे मे जानेंगे साथ ही तेज सिंह और बिहारीलाल के किस्से को भी जानेंगे मायारनी ओर उसकी बहनों का क्यू तिलिस्म पर इतना प्रेम है जानने के लिए साइन इस भाग को
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चंद्रकांता संतति अध्याय 6 (देवकीनंदन खत्री)
इस अध्याय में आप महारानी मायारानी और उनकी बहनों का हाल जानेंगे। इसके साथ साथ आपको भूतनाथ और कमलिनी के बारे मे भी पता चलेगा
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चंद्रकांता संतति अध्याय 5 (देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप जानेंगे की किस तरह राजा दिग्विजय सिंह ने लालच वश राजा वीरेन्द्र सिंह को और उनके साथियों को न केवल कैद किया बल्कि उन्हें मारने का भी आदेश दे दिया । परंतु किस प्रकार वे वहा से भाग निकले ये तो आपको सुन कर ही जानना पड़ेगा । इसके साथ ही अजीतसिंह की लाश को देखकर भैरो सिंह और तारा सिंह ने...
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चंद्रकांता संतति अध्याय 4( देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप लाली और कुंदन का हाल और वीरेन्द्र सिंह के साथियों की चालाकी से कुमार आनंद सिंह का कैद से छूटना और रोहतासगढ़ का विजेन्द्र सिंह के साथियों द्वारा जीतने के बयान के साथ साथ नानक नाम के शख्स के बारे में भी पता चलेगा जिसे एक स्त्री के प्यार ने धोखा दिया।
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चंद्रकांता संतति अध्याय 3(देवकी नंदन खत्री)
इस भाग में आप जानेंगे किशोरी को किस साधु ने उसके भाई भीमसेन से बचाया और आखिर क्यों अपनी ही बहन को मारना चाहता है भीमसेन क्यू रानी कलावती ने की आत्महाया और इंदरजीत सिंह के इलावा और कोन है जो किशोरी से विवाह करना चाहता है। और क्या इंदरजीत सिंह किशोरी को उसकी दुल्हन बनने से रोक पायेंगे
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चंद्रकांता संतति अध्याय 2 (बाबू देवकीनंदन खत्री )
इस भाग मे आप को किशोरी की मोसेरी बहन माधवी की दुष्टता का अंत और महाराजा वीरेन्द्र सिंह का उसके राज्य पर आधिपत्य स्थापित करना इसके अतिरिक्त विजेन्द्र सिंह के छोटे बेटे आनंद सिंह का भी इश्क परवान चढ़ना और एक बार फिर से किशोरी को किसी आदमी का अगवा करना ।
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चंद्रकांता संतति अध्याय 1 भाग (1) देवकीनंदन खत्री
चंद्रकांता की अपार सफलता के बाद देवकीनंदन जी ने चंद्रकांता संतति को लिखा इस उपन्यास मे आपको चंद्रकांता के पुत्रों और चपला और चंपा के पुत्रों के हाल मालूम होंगे अपितु महाराज शिवदत्त की दुश्मनी के साथ साथ उनके नेक दिल बच्चो से भी परिचय होगा।
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Chandrkanta season 4(देवकीनंदन खत्री)
इस भाग में आप बद्रीनाथ की चालाकी;" चंद्रकांता और वीरेंद्र सिंह का मिलन "और जानेंगे सिद्घनाथ योगी और वनकन्या का राज और क्यू इन्होंने कुमारी चंद्रकान्ता और कुमार की सहायता
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Chandrakanta season 03
वनकन्या का शादी का इकरार नामा कुआर ने मंजूर करना एक बुढ़िया का आ कर कुमार को शादी के लिए ये कह कर विवश करना की वो मिंटो मे तिलस्म तोड़ने का उपाय बता सकती हैं
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Chandrakanta season 02
चंद्रकांता या चावल की खबर लेन तेज सिंह ने किसको भेजा
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Chandrakanta Season 01 Written by Devkinandan Khatri
इस उपन्यास का आधार प्रेम है। जो चंद्रकांता 💞 को विजयगढ़ के राजकुमार से हैं । ये प्रेम कभी सफल नही हो सकता क्योंकि दोनों राज्यो मे खानदानी दुश्मनी है
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