PODCAST · society
Sumit Kumar Pandey: The Inner Voice
by Sumit Kumar Pandey
Sumit Kumar Pandey:The Inner Voice is a podcast platform where you can listen spritual, motivational, life lessons, literature and many more thoughtful talk by Sumit Kumar Pandey. Sumit Kumar Pandey is also a RJ at Gyanvani FM 105.6 MHz Varanasi and Former Radio Presenter at All India Radio Varanasi. He also belongs to Research and Journalism. Currently he's working as Research Assistant at Atal Bihari Vajpeyi Language, Literature and Journalism Research Institute. He's also pursuing Ph.D. In Journalism and Mass Communication from Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University Varanasi.
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कुछ अपनी कुछ जग की
ये सेगमेंट ऐसा है जिसमें कुछ अपनी लिखित और कुछ दुनिया के अन्य कवियों की रचित कविताओं को प्रस्तुत किया जाएगा
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उसको अच्छा नहीं लगूँगा मैं, अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं
अपनी मर्ज़ी से कुछ चुनूँगा मैंहर अदा पर नहीं मरूँगा मैंवो अगर ऐसे देख ले मुझकोउसको अच्छा नहीं लगूँगा मैंबाग़ में दिल नहीं लगा अब केअगले मौसम नहीं खिलूँगा मैंउससे आगे नहीं निकलना परउसके पीछे नहीं चलूँगा मैंकह गए थे वो याद रक्खेंगेयाद ही तो नहीं रहूँगा मैं - Vishal Bagh
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इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं
सब जिनके लिए झोलियां फैलाए हुए हैंवो रंग मेरी आंख के ठुकराए हुए हैंइक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जातीइक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं दो चार सवालात में खुलने के नहीं हमये उक़दे तेरे हाथ के उलझाए हुए हैंअब किसके लिए लाए हो ये चांद सितारेहम ख़्वाब की दुनिया से निकल आए हुए हैंहर बात को बेवजह उदासी पे ना डालोहम फूल किसी वजह से कुम्हलाए हुए हैंकुछ भी तेरी दुनिया में नया ही नहीं लगतालगता है कि पहले भी यहां आए हुए हैंहै देखने वालों के लिए और ही दुनियाजो देख नहीं सकते वो घबराए हुए हैं सब दिल से यहां तेरे तरफ़दार नहीं हैंकुछ सिर्फ़ मिरे बुग़्ज़ में भी आए हुए हैं फ़रीहा नक़वी
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मेरे दोस्त, तुम मुझसे कुछ भी कह सकते हो…
क्या तुम्हारा नगर भी दुनिया के तमाम नगरों की तरह किसी नदी के पाट पर बसी एक बेचैन आकृति है? क्या तुम्हारे शहर में जवान सपने रातभर नींद के इंतज़ार में करवट बदलते हैं? क्या तुम्हारे शहर के नाईं गानों की धुन पर कैंची चलाते हैं और रिक्शेवाले सवारियों से अपनी ख़ुफ़िया बात साझा करते हैं? तुम्हारी गली के शोर में क्या प्रेम करने वाली स्त्रियों की चीखें घुली हैं? क्या तुम्हारे शहर के बच्चे भी अब बच्चे नहीं लगते क्या उनकी आँखों में कोई अमूर्त प्रतिशोध पलता है? क्या तुम्हारी अलगनी में तौलिये के नीचे अंतर्वस्त्र सूखते हैं? क्या कुत्ते अबतक किसी आवाज़ पर चौंकते हैं क्या तुम्हारे यहाँ की बिल्लियाँ दुर्बल हो गई हैं तुम्हारे घर के बच्चे भैंस के थनों को छूकर अब भी भागते हैं..? क्या तुम्हारे घर के बर्तन इतने अलहदा हैं कि माँ अचेतन में भी पहचान सकती है..? क्या सोते हुए तुम मुट्ठियाँ कस लेते हो क्या तुम्हारी आँखों में चित्र देर तक टिकते हैं और सपने हर घड़ी बदल जाते हैं…? मेरे दोस्त, तुम मुझसे कुछ भी कह सकते हो… बचपन का कोई अपरिभाष्य संकोच उँगलियों की कोई नागवार हरकत स्पर्श की कोई घृणित तृष्णा आँखों में अटका कोई अलभ्य दृश्य मैं सुन रहा हूँ… रचयिता: गौरव सिंह स्वर: डॉ. सुमित कुमार पाण्डेय
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रूह तक रास्ता बनाया जा रहा है, ज़िस्म को ज़रिया बनाया जा रहा है
रूह तक रास्ता बनाया जा रहा है, ज़िस्म को ज़रिया बनाया जा रहा है। ज़ख्म पर नहीं आँख पर बाँधी है पट्टी, चोट को अंधा बनाया जा रहा है॥ नस्ल (generation) को भीड़ का आदी बना कर, अस्ल (real) में तनहा बनाया जा रहा है। पाप को अंजाम देने के लिए अब, धर्म को जरिया बनाना जा रहा है॥ स्वरस्वर: डॉडॉ. सुमिसुमित कुमारकुमार पाण्पाण्डेय शायराशायरा: कीर्तिकीर्ति
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Meaning of Life (जीवन का अर्थ)
स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय, सामग्री: सुमित एवं हिन्दीजेन.कॉम
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स्वयं की शक्ति को पहचानें
सामग्री: सरल मनोज, स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय
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भीड़तन्त्र: सच बोलने वाला अपराधी है
सामग्री: अमित मंडलोई, स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय
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जीवन का मतलब, अपने होने का मतलब
Know yourself and your inner power.
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Sumit Kumar Pandey:The Inner Voice is a podcast platform where you can listen spritual, motivational, life lessons, literature and many more thoughtful talk by Sumit Kumar Pandey. Sumit Kumar Pandey is also a RJ at Gyanvani FM 105.6 MHz Varanasi and Former Radio Presenter at All India Radio Varanasi. He also belongs to Research and Journalism. Currently he's working as Research Assistant at Atal Bihari Vajpeyi Language, Literature and Journalism Research Institute. He's also pursuing Ph.D. In Journalism and Mass Communication from Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University Varanasi.
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Sumit Kumar Pandey
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