EPISODE · Aug 4, 2025 · 2 MIN
इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं
from Sumit Kumar Pandey: The Inner Voice · host Dr. Sumit Kumar Pandey
सब जिनके लिए झोलियां फैलाए हुए हैंवो रंग मेरी आंख के ठुकराए हुए हैंइक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जातीइक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं दो चार सवालात में खुलने के नहीं हमये उक़दे तेरे हाथ के उलझाए हुए हैंअब किसके लिए लाए हो ये चांद सितारेहम ख़्वाब की दुनिया से निकल आए हुए हैंहर बात को बेवजह उदासी पे ना डालोहम फूल किसी वजह से कुम्हलाए हुए हैंकुछ भी तेरी दुनिया में नया ही नहीं लगतालगता है कि पहले भी यहां आए हुए हैंहै देखने वालों के लिए और ही दुनियाजो देख नहीं सकते वो घबराए हुए हैं सब दिल से यहां तेरे तरफ़दार नहीं हैंकुछ सिर्फ़ मिरे बुग़्ज़ में भी आए हुए हैं फ़रीहा नक़वी
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इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं
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