PODCAST · society
Voice Of Sanket
by Sanket Pandey
यहाँ थोक भाव मे टूटे दिलों का हाल बयाँ होता है, और उसकी मरहमपट्टी की जाती है।
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प्रेम बनाम प्रजनन
प्रेम अनजाना रहस्य है और प्रजनन पसरा हुआ विस्तार है।
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साँप और नेवला - सभ्यताओं का युद्ध (From archives)
Two nation theory in parallel universe!
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सूरज का चालीसवां फेरा
समय अच्छा, बुरा, धीमा, तेज़, लम्बा छोटा सब होता है। समय जितने रूप धर सकता है कोई और धर सकता है क्या?
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ग्रीटिंग कार्ड और सच्ची का नया साल
जब पेन की स्याही और ग्रीटिंग कार्ड के सख़्त कागज़ मिलकर नया साल मुबारक कर देते थे।
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इश्क़ का साढ़े सातवां मक़ाम
इश्क़ का साढ़े सातवां मक़ाम - जी भर कर जी हुई ज़िंदगी
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उत्तर प्रदेश - अधोपतन से उर्ध्वगमन तक
उत्तर प्रदेश - दुनिया को प्रतिभा का कच्चा माल देकर खुद अपने हँसते खेलते आँगन को कंगाल कर दे रहा था। उसी पर एक टिप्पणी।
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ज़ेहरा और मानव - टीस का पूर्णविराम
पूर्ण विराम और हज़ारों खाली पन्ने
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ज़ेहरा और मानव - महकी मुलाकातें
बात या साथ, दोनों में क्या खास जब ये समझ आना बंद हो जाए तो आप की मुलाकातें महक उठती हैं।
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ज़ेहरा और मानव - सिलसिला
बातें बेल की तरह हैं, जहां सहारा मिला वहीं बढ़ जाती हैं, और फैलने लगती हैं छाने लगती हैं। और अगर बातों में दम हो तो बातों से उपजी यादें एक दिन बरगद बन जाती हैं, जितनी पुरानी उतनी ही शाखाएँ और उनसे लटकती उतनी ही जड़ें।
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ज़ेहरा और मानव - रात के दो-ढाई बजे
बातें ही बात बढ़ाती हैं, बशर्ते लोग बातें कर रहे हों, बस बोल न रहे हों।
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ज़ेहरा और मानव - गुंडे और गाने
नायक गुंडों की पिटाई भी कर सकता है और गाने भी गा सकता। हिंदी सनीमी ने तो यही दिखाया है खैर!
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ज़ेहरा और मानव - ५ बनाम ३६५
तुम्हारे साथ बिताया समय ही मेरी दौलत है, उसे दिमाग़ में घुमा लेता हूं तो जो ROI मिलता है, वो कोई multibagger नहीं दे पाएगा।
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ज़ेहरा और मानव - Love in the air
जब हम किसी के बगल होने भर से खिल जाएं, तो समझिए कि आप दोनों बीच के अनूठा अनुनाद है।
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ज़ेहरा और मानव - उन्नीस से उन्यासी तक
जो हवा में है, वो हमेशा मामूली नहीं होता और जो ठोस है वो हमेशा खास नहीं होता।
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ज़ेहरा और मानव - सांसे, बातें और पहाड़
आज बिना कुछ चाहे वो ज़ेहरा को अपनी आँखों मे देखने दे रहा था, इस उम्मीद में कि ज़ेहरा उसके मन के उस कोने में उतर जाए जहाँ कभी कोई नहीं गया, किसी ने वो जगह बुहार के वहाँ थोड़ा पानी छिड़क कर दीपक नहीं जलाया
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ज़ेहरा और मानव - भँवरे की गुनगुन
उस पहाड़ पर जाकर हम लौट तो आए , और जितना खुद को लेकर गए थे उससे कहीं ज्यादा ही होकर आए, फिर लगता है वहां बहुत कुछ छोड़ आए!
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दोपहर और दो साँसें
बेतरतीब से कमरे के बीच में एक पलंग जिसपर हम दोनों पसरे थे, पर्दे लगे थे और रोशनी छन कर आ रही थी, मैं उसे देख रहा था, उसकी आंखों के नीचे के हल्के स्याह निशान, उसका वो सफेद सा चेहरा, वो मेरी दाढ़ी और मूंछों के बालों में अपनी उंगलियां फेर रही थी, मुझे बहुत दिन तक अपनी दाढ़ी का वो हिस्सा याद था
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फूलों की सड़क
लाल-केसरिया-सफ़ेद रंग से पटे उस सड़क के दोनों किनारे ... और उसके बीच से कहीं बहुत दूर जाती वो सड़क। उस खुश्बू में, सब कुछ नरम सा था, हमारे साथ की तरह
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जो दूर है वो नूर है।
तारों तक पहुंचने में भी आपका ज्यादातर समय तो अंतरिक्ष में ही बीतता है, ठीक वैसे ही सच ढूंढने वाले का जीवन भी झूठ को पार करने में ही बीतता है।
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खाली रातें
रातों के ढेर में तुम्हारी यादें, भूँसे के ढेर में चमकती सुई।
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रास्ते, बातें और सिर्फ तुम
गुबार-ए-दिल, जो जहाँ बरस जाए बस प्यार की वो घाँस उगा देता है, जो हर बार किसी के कदमों से दबाकर भी फिर लहलहा उठती है। लेखन-स्वर - संकेत पाण्डेय
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Bicycle a lovestory | साईकिल एक प्रेमकथा
रात में कहीं जाने की गरज बिना, साईकिल चलाना खुद से बातें करने का मोहक माध्यम है, आईए उसकी की थोड़ी सी बात कह सुन लें।
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मकड़ी का जाला
शांत एकांत और कोलाहल से भरे अकेलेपन का द्वंद। स्वर और लेखन - संकेत पांडेय
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राम मंत्र
रामनवमी के पावन पर्व पर अपने परमप्रतापी पूर्वज मर्यादापुरुषोत्तम को मेरा नमन! लेखन और स्वर - संकेत पाण्डेय
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बोलो क्योंकि बोल सकते हो
यहाँ दुनिया भर की बात दिल की उस गहराई से कही जाती है जहाँ मैं अकेला बैठा होता हूँ।
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गुनाहों का देवता - भाग एक
गुनाहों का देवता - धर्मवीर भारती का कालजयी उपन्यास है, जो 1950 में लिखा गया और अबतक एक अमर प्रेमकथा बना हुआ, जो जवान हुआ उसे इस उपन्यास को महसूस करना चाहिए।
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रातें
मर्द को दर्द होता है, बस उसकी दुकान नहीं सजती है। एक मर्द का दर्द उसकी किसी सर्द रात से उठाया हुआ, जस का तस यहाँ परोसा गया है। लेखन : संकेत पाण्डेय, स्वर : संकेत पाण्डेय
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यहाँ थोक भाव मे टूटे दिलों का हाल बयाँ होता है, और उसकी मरहमपट्टी की जाती है।
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Sanket Pandey
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