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Vicharkranti Hindi — 225 episodes · page 2 of 3
069.Bahumulya Vartaman Ka Sadupyog Keejiye
068.Apne Ko Aaveshon Se Bachaiye
065 Aatmnirman Sabse Bada Punya Parmarth
064 Vartman Paristhitiyan Hamne Swayam Utpann Ki Hain
060 Karm Ki Swatantrata
058 Jeene Yogya Jeevan Jiyo
056 Josh Ke Sath Hosh
054 Man Se Bhay Ki bhavnayen Nikal Phenkiye
053 Hamari Duniyan Vaisi Jaisa Hamara Man
051 Satyata Me Akoot Bal Bhara Hua Hai
050 Jeevan Ko Tapsyamay Banaiye
048 Shekhi Mat Bagharo
041 Jindagi Me Aanand Ka Nirman Karo
040 Rone Se Kam Nahi Chalega
039 Mrityu Ka Bhay Door Kar Dijiye
037 Gyanyog Ki Ek Sulabh Sadhna
026 Badlon Ki Tarah Baraste Raho
सच्चा कर्तव्य_AJ_Jan_2022.m4a
021 Satya Swaroop Aatma
001 Utho Himmat Karo
Akhand jyoti.. Suvichar. Audio
Mrityu ka bhay door kr dijiye..
Dharm ka saar..
Jindgi me aanand ka nirman kro..
Gyan yog ki ek sulabh sadhna..
Satya swaroop Aatma..
Utho himmat kro..
Bhagya ka nirman apne hath me hai..
विनम्रता
महानता
आत्म परिष्कार
ईश्वर प्राप्ति
वृक्षारोपण हमारा पुनीत कर्तव्य
अकारण विरोध एवं विद्वेष से निपटने का राजमार्ग
सच्चा कर्तव्य
व्यक्तित्व से जुड़े सफलता के तार
उदारता
उपयोगिता
परोपकार
विश्वास
श्रम एवं जयते
झगड़े का फल
संवेदनशीलता
ज्ञान का महत्व
विपत्ति की आशंका से घबराइए नहीं
विचारों की तन्मयता
परिश्रम के साथ विश्राम भी है जरूरी
बोलने से पहले सोचें
आदर्श नेतृत्व और टीम भावना
अपने स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
समय का महत्व जानें
बनें पहले अच्छा इंसान
आदर्श वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई
दिखावे की भक्ति
त्याग का महत्व
पंचतंत्र की कहानियां
सबसे बड़ा कौन
श्रेष्ठ पुरुष
कर्मों का परिणाम
Kahani - अर्जुन का भरोसा
व्रतशील जीवन की गरिमा
जीवन का अर्थ
विपत्तियों को कैसे जीता जाए
ईश्वर अपने बताए नियमों मर्यादाओं में बंधा है
परिवर्तन में प्रगति और जीवन
यथार्थवादी बनें संकल्प बल प्रखर करें
विभूति रहित संपदा निरर्थक है
निरंकुश बुद्धिवाद हमारा सर्वनाश करके ही छोड़ेगा
यथार्थता को समझें आग्रह न थोपें
विधेयात्मक चिंतन से मानसिक संतुलन ठीक रखें
जीवन ईश्वर का स्वरूप एवं वरदान है
आनंद अपनी ही मुट्ठी में भरा पड़ा है
भीतर का खोखलापन और सड़ी जड़ें
देने वाला घाटे में नहीं रहता
संकल्प और आत्म बल एक ही तथ्य के दो पक्ष हैं
दुष्कर्मों का फल भोगना पड़ता है
समय का औषध रूप
देवता कौन है
ईर्ष्या रूपी विष से बचना चाहें तो ऐसे बचें
जीवन संग्राम में पुरुषार्थ की आवश्यकता
बाहरी संपदा आंतरिक समृद्धि की छाया मात्र है
सच्चा मानोचित पुरुषार्थ
मनुष्य परमात्मा का प्रखर प्रतिनिधि
विवेक युक्त दूरदर्शी बुद्धिमत्ता ही श्रेष्यकर है
आदर्शवादी महत्वाकांक्षाओं के फलितार्थ
अध्यात्म का लक्ष्य मात्र आत्म कल्याण
न तो हिम्मत हारें, ना ही हार स्वीकार करें
समर्थ का आश्रय लें
सुखी जीवन का आधार भावनात्मक संतुलन
सौभाग्य भरे क्षणों को तिरष्कृत ना करें
टीमवर्क की महत्ता
विरासत में बच्चों के लिए धन न छोड़ें
परदोष दर्शन की कुत्सा त्यागें
अंतःकरण की आवाज सुनो और उसका अनुकरण करो
दृढ़ इच्छा शक्ति के चमत्कार
कठिनाई का सामना करने को तैयार रहो
अकेले चलना पड़ेगा
आत्म निरीक्षण और उसकी महत्ता
मन से भय की भावनाऐं निकाल फेकिये
समाज का ऋण चुकाइए