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Aagman | Dinesh Kumar Shukla

EPISODE · Apr 11, 2023 · 4 MIN

Aagman | Dinesh Kumar Shukla

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

आगमन / दिनेश कुमार शुक्ल जंगी बेड़ों पर नहींन तो दर्रा-खैबर सेआयेंगे इस बार तुम्हारे भीतर से वेधन-धरती ही नहींतुम्हारा मर्म, तुम्हारे सपने भी वे छीनेंगे इस बार,वे तुम सबके रक्त पसीने और आँसुओंका बदलेंगे रंगतुम्हारी दृष्टि तुम्हारा स्वादतुम्हारी खालतुम्हारी चाल-ढाल का भी बदलेगे ढंग,बीजों के अंकुरणऔर जीवों के गर्भाधाननियंत्रित होंगे उनके कानूनों सेतुम्हें पता ही नहींतुम्हारी कविता में वेपहले से ही घोल चुके हैंअपने छल के छन्दतुम्हारी भाषाओं के अंक मिथक किस्से मुहावरेसिर्फ अजायबघर में अब पाये जायेंगेदेशों की सीमाओं का उनकी सेनायेंखुलेआम इस बार अतिक्रमण नहीं करेंगीवे तो सिर्फ इरेज़र से ही मिटा रहे हैं देश-देश की सीमा रेखासात द्वीप-नवखण्ड और सातों समुद्र मेंसिर्फ पण्य की सार्वभौम सत्ता का सिक्काचला करेगाइस एकीकृत विश्वग्राम के मत्स्य-न्याय मेंएक साथ सब जीव जलेंगे दावानल मेंजिंसों की इलहाम भरी नई खेप अवतरित हुई हैएक-भाव रस एक-एक भाषा में सारेबन्दीजन गुणगान कर रहे हैं उसका हीनये ब्रान्ड का प्रेम उतारा था बाज़ार मेंजिसने पहलेलान्च किये हैं उसी कम्पनी नेहत्या के नये उपकरण,दाल-भात लिट्टी-चोखे की यादें आई हैं बाज़ार मेंसोहर चैता कजरी कीस्वर लहरी के पाउच बिकते हैंविश्व शान्ति के सन्नाटे मेंसोनल चिड़िया अभी कहीं फड़फड़ा रही है आसमान मेंनई रोशनी की गर्मी मेंउसके पंख जले जाते हैं। 

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Aagman | Dinesh Kumar Shukla

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