EPISODE · Sep 19, 2023 · 2 MIN
Aao, Chale Hum | Gyanendrapati
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
आओ, चलें हम - ज्ञानेन्द्रपतिआओ, चलें हमसाथ दो क़दमहमक़दम होंदो ही क़दम चाहेदुनिया की क़दमताल से छिटकहाथ कहाँ लगते हैं मित्रों के हाथघड़ी-दो घड़ी कोघड़ीदार हाथ -- जिनकी कलाई की नाड़ी से तेज़धड़कती है घड़ीवक़्त के ज़ख़्म से लहू रिसता ही रहता है लगातारकहाँ चलते हैं हम क़दम-दो क़दमउँगलियों में फँसा उँगलियाँउँगलियों में फँसी है डोरसूत्रधार की नहींकठपुतलियों कीहथेलियों में फँसी हैएक बेलनज़िन्दगी को लोई की तरह बेलकररोटी बनातीकिनकी अबुझ क्षुधाएँउदरंभरि हमारी ज़िन्दगियाँभस्म कर रही हैंबेमकसद बनाए दे रही हैंखास मकसद सेआओ, विचारें हममाथ से जोड़कर माथदो क़दम हमक़दम हों हाथ से जोड़े हाथ
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Aao, Chale Hum | Gyanendrapati
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