EPISODE · Apr 24, 2023 · 3 MIN
Achcha Laga | Ramdarash Mishra
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
'अच्छा लगा' - रामदरश मिश्रआज धरती पर झुका आकाश तो अच्छा लगासिर किये ऊँचा खड़ी है घास तो अच्छा लगाआज फिर लौटा सलामत राम कोई अवध मेंहो गया पूरा कड़ा बनवास तो अच्छा लगाथा पढ़ाया मांज कर बरतन घरों में रात-दिनहो गया बुधिया का बेटा पास तो अच्छा लगालोग यों तो रोज़ ही आते रहे, आते रहेआज लेकिन आप आये पास तो अच्छा लगाक़त्ल, चोरी, रहज़नी व्यभिचार से दिन थे मुखरचुप रहा कुछ आज का दिन ख़ास तो अच्छा लगाख़ून से लथपथ हवाएँ ख़ौफ-सी उड़ती रहींआँसुओं से नम मिली वातास तो अच्छा लगाहै नहीं कुछ और बस इंसान तो इंसान हैहै जगा यह आपमें अहसास तो अच्छा लगाहँसी हँसते हाट की इन मरमरी महलों के बीचहँस रहा घर-सा कोई आवास तो अच्छा लगारात कितनी भी घनी हो सुबह आयेगी ज़रूरलौट आया आपका विश्वास तो अच्छा लगाआ गया हूँ बाद मुद्दत के शहर से गाँव मेंआज देखा चाँदनी का हास तो अच्छा लगादोस्तों की दाद तो मिलती ही रहती है सदाआज दुश्मन ने कहा–शाबाश तो अच्छा लगा
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Achcha Laga | Ramdarash Mishra
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