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Amarphal | Arun Kamal

EPISODE · May 8, 2023 · 3 MIN

Amarphal | Arun Kamal

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

तोते का जुठाया अमरूद दो मुझेजिसके भीतर की लामिला फूटती हो बाहरगिलहरी के दाँतों के दागवाला जामुन दो काला अंधकार के रस से भरा हुआपक कर अपने ही उल्‍लास से फटताएक फल दो शरीफे काऔर रस के तेज वेग से जिस ईख केफटे हों पोरवह ईख दो मुझेऔर खूब चौड़े थन वाली गाय का दूधजिसके चलने भर सेछीमियों से झरता हो दूधमुझे छप्‍पन व्‍यंजन नहींबस एक फल दोसूर्य का लाल फलअंधकार का काला फलजिसे बस एक बार काटूँऔर अमर हो जाऊँवही अमरफल !सबसे अच्‍छे फल थे वेजो ऋतु में आएजब पौधा थापूरे उठान परलेकिन सबसे अंतिम फल हीजो पड़े डाल पर ज्‍वाएटेढ़े बाँगुरअगली ऋतु के लिए सहेजे हमनेवही अमरफल!

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